<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298</id><updated>2012-02-16T20:57:05.888+05:30</updated><category term='संसद'/><category term='media'/><category term='बसपा'/><category term='माफिया'/><category term='चंद्रशेखर'/><category term='govt'/><category term='राजनीति'/><category term='राष्ट्रीय धरोहर'/><category term='up election'/><category term='बलिया'/><category term='आरएसएस'/><category term='विकास की राह'/><category term='इलाहाबाद बैंक'/><category term='allahabad'/><category term='मायावती'/><category term='बीजेपी'/><category term='अपराध'/><category term='कल्याण सिंह'/><category term='press'/><category term='कांग्रेस'/><category 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गांधी</title><content type='html'>इस गांधी की चर्चा मीडिया में अकसर ना के बराबर होती है और अगर होती भी है तो, सिर्फ और सिर्फ गलत वजहों से। मीडिया और इस गांधी की रिश्ता कुछ अजीब सा है। न तो मीडिया इस गांधी को पसंद करता है न ये गांधी मीडिया को पसंद करता है। इस गांधी के प्रति मीडिया दुराग्रह रखता है। किस कदर इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि देश के पहले परिवार से निकले इस गांधी के भाई राहुल गांधी के श्रीमुख से कुछ भी अच्छा बुरा निकले तो, मीडिया उसे लपक लेता है और अच्छा-बुरा कुछ भी करके चलाता रहता है। जब ये दूसरा गांधी यानी वरुण गांधी कहता है कि उत्तर प्रदेश में 2012 में बीजेपी सत्ता में आएगी और हम सत्ता में आए तो, मायावती की मूर्तियां हटवाकर राम की मूर्तियां लगवाएंगे तो, किसी भी न्यूज चैनल पर ये टिकर यानी नीचे चलने वाली खबर की पट्टी से ज्यादा की जगह नहीं पाती है लेकिन, जब मायावती के खिलाफ देश के पहले परिवार का स्वाभाविक वारिस यानी राहुल गांधी मायावती के खिलाफ कुछ भी बोलता है या कुछ नहीं भी बोलता है तो, भी सभी न्यूज चैनलों पर बड़ी खबर बन जाती है यहां तक कि हेडलाइंस भी होती है। &lt;br /&gt;वरुण गांधी को ये बात समझनी होगी कि आखिर उसके अच्छे-बुरे किए को मीडिया तवज्जो क्यों नहीं देता। वरुण को ये समझना होगा कि जाने-अनजाने ये तथ्य स्थापित हो चुका है कि उनका चचेरा भाई राहुल गांधी अपने पिता राजीव गांधी की उस विरासत को आगे बढ़ा रहा है जो, गांधी-नेहरु की असली विरासत मानी जाती है। वो, राजीव गांधी जो नौजवानों के सपने का भारत बनाना चाहता था लेकिन, जिसकी यात्रा अकाल मौत की वजह से अधूरी रह गई। लेकिन, जब वरुण गांधी की बात होती है तो, सबको लोकसभा चुनाव के दौरान वरुण गांधी का मुस्लिम विरोधी भाषण ही याद आता है। और, तुरंत याद आ जाता है कि ये संजय गांधी का बेटा है जो, जबरदस्ती नसबंदी के लिए कुख्यात था। यहां तक कि आपातकाल का भी पूरा ठीकरा संजय गांधी के ही सिर थोप दिया जाता है। मीडिया ये तो कहता है कि आपातकाल ने इंदिरा की सरकार गिरा दी, कांग्रेस को कमजोर कर दिया। लेकिन, मीडिया आपातकाल के पीछे के हर बुरे कर्म का जिम्मेदार संजय गांधी को ही मानता है। यहां तक कि कांग्रेस में रहते हुए भी संजय गांधी सांप्रदायिक और अछूत गांधी बन गया। राजीव की कंप्यूटर क्रांति की चर्चा तो खूब होती है लेकिन, देश की सड़कों पर हुआ सबसे बड़ी क्रांति मारुति 800 कार के जनक संजय गांधी को उस तरह से सम्मान कभी नहीं मिल पाया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;और, फिर जब वरुण गांधी बीजेपी के जरिए लोकतंत्र में सत्ता की ओर बढ़ने की कोशिश करने लगा फिर तो, वरुण के ऊपर पूरी तरह से अछूत गांधी का ठप्पा लग गया। इसलिए वरुण को समझना होगा कि इस देश का मूल स्वभाव किसी भी बात की अति के खिलाफ है। फौरी उन्माद में एक बड़ा-छोटा झुंड हो सकता है कि ऐसे अतिवादी बयानों से पीछे-पीछे चलता दिखाई दे लेकिन, ये रास्ता ज्यादा दूर तक नहीं जाता। इसलिए वरुण गांधी को दो काम तो तुरंत करने होंगे पहला तो ये कि मीडिया से बेवजह की दूरी बनाकर रखने से अपनी अच्छी बातें भी ज्यादा लोगों तक नहीं पहुंचेंगी ये समझना होगा। हां, थोड़ी सी भी बुराई कई गुना ज्यादा रफ्तार से लोगों के दिमाग में स्थापित कराने में मीडिया मददगार होगा। दूसरी बात ये कि अतिवादी एजेंडे को पीछे छोड़ना होगा। जहां एक तरफ राहुल गांधी भले कुछ करे न करे- गरीब-विकास की बात कर रहा हो वहां, वरुण गांधी को राम की मूर्तियां कितना स्थापित करा पाएंगी ये समझना होगा। राम के नाम पर बीजेपी को जितना आकाश छूना था वो छू चुकी अब काम के नाम पर ही बात बन पाएगी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ऐसा नहीं है कि वरुण गांधी को पीलीभीत से सिर्फ भड़काऊ भाषण की वजह से ही जीत मिली है। वरुण गांधी अपने क्षेत्र के हर गांव से वाकिफ हैं। राहुल के अमेठी दौरे से ज्यादा वरुण पीलीभीत में रहते हैं। लेकिन, वरुण के कामों की चर्चा मीडिया में बमुश्किल ही होती है। वरुण गांधी ने अपने लोकसभा क्षेत्र में 2000 गरीब बेटियों की शादी कराई ये बात कभी मीडिया में आई ही नहीं। जबकि, छोटे-मोटे नेताओं के भी ऐसे आयोजनों को मीडिया में थोड़ी बहुत जगह मिल ही जाती है। जाहिर है वरुण गांधी की मीडिया से दूरी वरुण गांधी के लिए घातक बन रही है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वरुण गांधी से हुई एक मुलाकात में एक बात तो मुझे साफ समझ में आई कि कुछ अतिवादी बयानों और मीडिया से दूरी को छोड़कर ये गांधी अपने एजेंडे पर बखूबी लगा हुआ है। वरुण गांधी को ये अच्छे से पता है कि फिलहाल राष्ट्रीय राजनीति में नहीं उसकी परीक्षा उत्तर प्रदेश की राजनीति में होनी है। वरुण का लक्ष्य 2012 में होने वाला उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव है जिसमें वरुण बीजेपी को सत्ता में लाना चाहता है और खुद मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठना चाहता है। वरुण के इस लक्ष्य को पाने में सबसे अच्छी बात ये है कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी का कार्यकर्ता अभी के नेतृत्व से बुरी तरह से निराश है और उसे वरुण गांधी में एक मजबूत नेता नजर आ रहा है। बीजेपी में अपनी राजनीति तलाशने वाले नौजवान नेताओं को ये लगने लगा है कि वरुण गांधी ही है जो, फिर से बीजेपी के परंपरागत वोटरों में उत्साह पैदा कर सकता है। शायद यही वजह है कि 14 अशोक रोड पर उत्तर प्रदेश के हर जिले से 2-4 नौजवान नेता वरुण गांधी से मुलाकात करने पहुंचने लगे हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वरुण गांधी के पक्ष में एक अच्छी बात ये भी है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वरुण को यूपी बीजेपी का नेता बनाने का मन बना चुका है। वरुण गांधी को संघ प्रमुख मोहनराव भागवत का अंध आशीर्वाद भले न मिले लेकिन, अगर वरुण भविष्य के नेता के तौर पर और राहुल गांधी की काट के तौर पर खुद को मजबूत करते रहे तो, संघ मशीनरी पूरी तरह से वरुण के पीछे खड़े होने को तैयार है। वरुण गांधी को ये बात समझ में आ चुकी है यही वजह है कि भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष का पद न लेकर बीजेपी में राष्ट्रीय सचिव बनने के बाद भी वरुण सिर्फ और सिर्फ उत्तर प्रदेश के बारे में सोच रहे हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अभी कुछ दिन पहले जब मीडिया में वरुण गांधी की तस्वीरें दिखीं थीं तो, सभी चैनलों पर यही देखने को मिला कि वरुण चप्पल पहनकर इलाहाबाद में क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद का माल्यार्पण करने चले गए थे। किसी भी अखबार या टीवी चैनल पर ये खबर देखने-पढ़ने को नहीं मिली कि वरुण जौनपुर में एक बड़ी रैली करके लौट रहे थे। राष्ट्रीय सचिव बनने के बाद ये वरुण की पांचवीं रैली थी और वरुण इस साल 20 और ऐसी रैलियां करके पूरे प्रदेश तक पहुंचने की कोशिश में हैं। अरसे बाद बीजेपी के जिले के नेताओं को ऐसा नेता मिला है जिसकी रैली के लिए बसें भरने में उन्हें ज्यादा प्रयास नहीं करना पड़ रहा है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ये गांधी भारतीय राजनीति की लंबी रेस का घोड़ा दिख रहा है। लेकिन, वरुण को उग्र बयानों से हिंदुत्ववादी नेता बनने के बजाए बीजेपी का वो नेता बनने की कोशिश करनी होगी जो, जगह कल्याण सिंह के बाद उत्तर प्रदेश में कोई बीजेपी नेता भर नहीं पाया है। और, ये जगह अब राम की मूर्तियां लगाने वाले बयानों से नहीं उत्तर प्रदेश के नौजवान को ये उम्मीद दिखाने से मिल पाएगी कि राज्य में ही रहकर उसकी बेहतरी के लिए क्या हो सकता है। उत्तर प्रदेश के 18 करोड़ लोगों को एक नेता नहीं मिल रहा है। अगर वरुण ये करने में कामयाब हो गए तो, भारतीय राजनीति में एक अलग अध्याय के नायक बनने से उन्हें कोई नहीं रोक पाएगा। वरुण की उम्र अभी 30 साल के आसपास है और वरुण के पास लंबी राजनीति करने का वक्त भी है, गांधी नाम भी और बीजेपी जैसी राष्ट्रीय पार्टी का बैनर भी। बस उन्हें खुद को अछूत गांधी बनने से रोकना होगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-5446359176275714186?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/5446359176275714186/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=5446359176275714186' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/5446359176275714186'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/5446359176275714186'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2010/05/blog-post.html' title='मीडिया का अछूत गांधी'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-2328611249687851997</id><published>2008-12-25T12:53:00.001+05:30</published><updated>2008-12-25T13:02:15.985+05:30</updated><title type='text'>मायावती, मुलायम को हर मामले में पीछे छोड़ देना चाहती हैं, नंगई में भी</title><content type='html'>मायाराज- जंगलराज का समानार्ती शब्द लगने लगा है। लेकिन, दरअसल ये जंगलराज से बदतर हो गया है। क्योंकि, जंगल का भी कुछ तो कानून होता ही है। 24 अगस्त को मैंने &lt;a href="http://batangad.blogspot.com"&gt;बतंगड़&lt;/a&gt; ब्लॉग पर लिखा था कि &lt;a href="http://batangad.blogspot.com/2008/08/blog-post_24.html"&gt;गुंडे चढ़ गए हाथी पर पत्थर रख लो छाती पर&lt;/a&gt; लेकिन, अब ये जरूरी हो गया है कि हाथी पर चढ़े गुंडों को पत्थरों से मार गिराया जाए। क्योंकि, पहले से bimaru उत्तर प्रदेश की बीमारी अब नासूर बनती जा रही है। शुरू में जब अपनी ही पार्टी के अपराधियों को मायावती ने जेल भेजा तो, लगा कि &lt;a href="http://updiary.blogspot.com/2008/06/blog-post_14.html"&gt;मायाराज, मुलायम राज से बेहतर है&lt;/a&gt;। लेकिन, ये वैसा ही था जैसा नया भ्रष्ट दरोगा थाना संभालते ही पुराने बदमाशों को निपटाकर छवि चमकाता है और अपने बदमाश पाल-पोसकर बड़े करता है। पता नहीं अभी up (उल्टा प्रदेश) को और कितना उलटा होना बाकी है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' 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TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>11</thr:total><georss:featurename>Allahabad, Uttar Pradesh, India</georss:featurename><georss:point>25.44297 81.828407</georss:point><georss:box>25.287958 81.5949475 25.597982 82.0618665</georss:box></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-5372587635753234870</id><published>2008-06-14T15:32:00.001+05:30</published><updated>2008-06-14T15:38:01.676+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='mayawati'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='up'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='govt'/><title type='text'>मायाराज पहले के राज से तो बेहतर ही है</title><content type='html'>मायावती सरकार के पूर्व मंत्री आनंदसेन यादव के खिलाफ आखिरकार गैरजमानती वारंट जारी हो गया। इसी हफ्ते में मायावती ने अपनी सरकार के एक और मंत्री जमुना प्रसाद निषाद को भी दबंगई-गुंडई के बाद पहले मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया। उसके बाद जमुना निषाद को जेल भी जाना पड़ा। इससे पहले भी मायावती की पार्टी के सांसद उमाकांत यादव को पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया था और उन्हें भी जेल जाना पड़ा था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब अगरउत्तर प्रदेश में कोई रामराज्य की उम्मीद लगाए बैठा है तो, इस दिन में सपने देखना ही कहेंगे। लेकिन, सारी बददिमागी और अख्कड़पन के बावजूद मुझे लगता है कि बरबादी के आलम में पहुंच गई उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था मायाराज में ही सुधर सकती है। ऐसा नहीं है कि &lt;a href="http://batangad.blogspot.com/2007/11/blog-post_2535.html"&gt;मायाराज में सबकुछ अच्छा ही हो रहा है।&lt;/a&gt; लेकिन, इतना तो है ही कि मीडिया में सामने आने के बाद, आम जनता की चीख-पुकार, कम से कम मायावती सुन तो रही ही हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुझे नहीं पता कि मायावती के आसपास के लोग सत्ता के मद में कितनी तानाशाही कर रहे हैं। लेकिन, मायावती ने जिस तरह से कल राज्य के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को जिस तरह से लताड़ा है वो, इतना तो संकेत दे ही रहा है कि मायावती को ये पता है कि अगर इस बार मिला स्वर्णिम मौका उन्होंने गंवा दिया तो, उत्तर प्रदेश के विकट राजनीतिक, सामाजिक समीकरण में दुबारा शायद ही उन्हें अपने बूते सत्ता में आने का मौका मिले। &lt;br /&gt;उन्होंने भरी बैठक में कहाकि &lt;br /&gt;जब थाने बिकेंगे तो, जनता कानून हाथ में लेगी ही। &lt;br /&gt;और, जनता कानून हाथ में तभी लेती है जब जनप्रतिनिधियों और कानून के रखवालों से उसे सही बर्ताव नहीं मिलता। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;और, मायावती के इस कहे पर यकीन इसलिए भी करना होगा कि इसके दो दिन पहले ही मायावती की सरकार के एक मंत्री जमुना प्रसाद निषाद जेल जा चुके थे। उन पर थाने में घुसकर गंडागर्दी करने, गोलियां चलाने का आरोप है। इसी में थाने में ही एक सिपाही की मौत हो गई थी। इससे पहले बसपा सरकार के मंत्री आनंदसेन यादव को बसपा के एक कार्यकर्ता की बेटी के साथ संबंध बनाने के बाद उसकी हत्या का आरोप लगने के बाद पहले मंत्री पद से हाथ धोना पड़ा था। और, अब गैरजमानती वारंट जारी हो चुका है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आनंदसेन के खिलाफ गैरजमानती वारंट और मंत्री पद से हटाया जाना ज्यादा महत्वपूर्ण इसलिए भी है कि इसी घटना के आसपास यूपी के पड़ोसी राज्य बिहार में एक बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने पत्रकारों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा था। लेकिन, देश भर से प्रतिक्रिया होने के बाद भी अनंत सिंह का कुछ नहीं बिगड़ा। सिर्फ पत्रकारों की पीटने के लिए अनंत सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात मैं नहीं कर रहा हूं। दरअसल वो पत्रकार अनंत सिंह से सिर्फ इतना पूछने गए थे कि एक लड़की ने मुख्यमंत्री को खत भेजकर अपनी जान का खतरा आपसे बताया है। साथ ही आप पर आरोप है कि आपने उस लड़की के साथ बलात्कार किया था। बस क्या था बिहार के छोटे सरकार गुस्से आ गए और पत्रकारों को दे दनादन शुरू हो गए। ये बता दें कि लालू के गुड़ों के मुकाबले नितीश के पास अनंत सिंह जैसे कुछ गिने-चुने ही गुंडे थे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बस इतनी ही उम्मीद है कि मायावती ने राज्य के अधिकारियों को जो भाषण दिया है। वो खुद उस पर अमल करती रहेंगी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' 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TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>8</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-5130294388305615026</id><published>2008-06-08T22:19:00.004+05:30</published><updated>2008-06-08T22:32:44.780+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='इलाहाबाद'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='लोकसभा चुनाव'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='बसपा'/><title type='text'>इलाहाबाद से बसपा एक और इतिहास बनाने की तैयारी में</title><content type='html'>उत्तर प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा के उपचुनावों के बाद मैंने लिखा था कि आखिर &lt;a href="http://batangad.blogspot.com/2008/04/blog-post_16.html"&gt;लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश से क्या संकेत मिल रहे हैं।&lt;/a&gt; उन संकेतों की पुष्टि लोकसभा चुनाव 2009 की पार्टियों की तैयारियों से और स्पष्ट हो रहा है। बीजेपी ने पहली 250 लोकसभा उम्मीदवारों की सूची जुलाई में जारी करने का ऐलान किया है। लेकिन, बसपा ने तो, उम्मीदवारों के नाम का ऐलान करना भी शुरू कर दिया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद की लोकसभा सीट हमेशा से बड़ी महत्व की मानी जाती रही है। ये सीट ज्यादातर देश और प्रदेश में किसी पार्टी की सत्ता का संकेत भी देती है। पिछले चुनाव में इलाहाबाद की दो महत्वपूर्ण सीटें इलाहाबाद और फूलपुर दोनों सपा के खाते में चली गई थी। इलाहाबाद से भाजपा के दिग्गज मुरली मनोहर जोशी को हराकर सपा के रेवती रमण सिंह सांसद हो गए। ये इलाहाबाद की बदकिस्मती इस मायने में थी कि इलाहाबाद लोकसभा की एक विधानसभा (करछना) के विधायक को जनता ने संसद तो पहुंचा दिया। लेकिन, संसद में पहुंचने के बाद रेवती रमण का कोई भी एक ऐसा काम नहीं दिखाई दिया जो, इलाहाबाद के विकास को आगे बढ़ाता। डॉक्टर जोशी के समय की कई बड़ी योजनाएं वापस चली गईं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;और, अब इस पर और दुखद खबर ये है कि तीन बार इलाहाबाद की सीट जीतकर रिकॉर्ड बनाने वाले डॉक्टर जोशी सिर्फ एक बार की हार के बाद सीट छोड़ रहे हैं। ये अब लगभग तय हो गया है कि डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी बनारस से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। अब चर्चा है कि केशरी नाथ त्रिपाठी इसी सीट से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। इसी लोकसभा की शहर दक्षिणी सीट से छे बार जीतने वाले केशरी नाथ प्रदेश अध्यक्ष रहते बसपा के नंद गोपाल नंदी से हार चुके हैं। और, इलाहाबाद लोकसभा की बीजेपी के सबसे ज्यादा वोटबैंक मानी जाने वाली सीट इलाहाबाद से कटकर फूलपुर सीट में जुड़ रही है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इलाहाबाद की दूसरी सीट फूलपुर से सपा से अतीक अहमद सांसद चुने गए थे। अब तो, जेल में हैं और सपा से निकाल दिए गए हैं। इस बार पता नहीं कैसे चुनाव लड़ेंगे। खैर, असली समीकरण अब बना है- हाल में ही भाजपा छोड़कर बसपा में जाने वाले कपिल मुनि करवरिया की वजह से। कपिलमुनि करवरिया, भाजपा विधानमंडल दल के मुख्य सचेतक उदयभान करवरिया के बड़े भाई हैं। इलाहाबाद से उदयभान करवरिया ही भाजपा के अकेले विधायक (बारा विधानसभा) हैं। सच्चाई ये है है कि डॉक्टर जोशी के साथ संबंध कुछ कम अच्छे होने की वजह से (टिकट न मिलने से ) कपिलमुनि करवरिया ने बसपा ज्वाइन कर लिया। ज्वाइनिंग के दिन ही बसपा ने कपिलमुनि करवरिया को फूलपुर लोकसभा सीट से बसपा प्रत्याशी घोषित कर दिया। शहर उत्तरी और नवाबगंज में ब्राह्मण वोटबैंक और कपिलमुनि के साथ भाजपा का एक बड़ा वोटबैंक शिफ्ट होने से ये सीट बसपा के लिए काफी आसान दिख रही है। अतीक के जेल में होने और बसपा की सरकार होने से तो मदद मिलेगी ही। और, बाहुबल में कपिलमुनि करवरिया भी कुछ कम तो हैं नहीं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कपलिमुनि करवरिया के बसपा ज्वाइन कराने में अहम रोल अदा करने वाले पुराने कांग्रेसी नेता और अब बसपा की सरकार में लाल बत्ती पाने वाले अशोक बाजपेयी को उसी दिन इलाहाबाद लोकसभा सीट से बसपा ने प्रत्याशी बना दिया है। अशोक बाजपेयी के बेटे हर्षवर्धन बाजपेयी को बसपा ने शहर उत्तरी से टिकट दिया था और हर्षवर्धन हजार से भी कम वोटों से विधानसभा हार गए थे। वोटबैंक  और इलाहाबाद और फूलपुर लोकसभा का परसीमन फिर से होने से बदले समीकरण से बसपा दोनों लोकसभा सीटों पर सबसे बेहतर प्रत्याशी खड़ा करने में कामयाब हो चुकी है। और, ये संकेत सफल हुए तो, इलाहाबाद की दोनों सीट जातकर बसपा नया इतिहास बनाएगी। &lt;strong&gt;साथ ही मेरा ये अनुमान और पक्का हो रहा है कि बसपा को इस बार 35-45 सीटें तो मिलेंगी ही।&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-5130294388305615026?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/5130294388305615026/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=5130294388305615026' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/5130294388305615026'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/5130294388305615026'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2008/06/blog-post.html' title='इलाहाबाद से बसपा एक और इतिहास बनाने की तैयारी में'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-3548344600829652282</id><published>2008-05-02T09:24:00.003+05:30</published><updated>2008-05-02T09:27:33.405+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='इलाहाबाद बैंक'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='राष्ट्रीय धरोहर'/><title type='text'>इलाहाबाद बैंक बनेगा राष्ट्रीय धरोहर</title><content type='html'>इलाहाबाद में इलाहाबाद बैंक की मुख्य शाखा अब राष्ट्रीय धरोहर बनेगी। पुराने जमाने के महल की सी इस इमारत का वो स्वरूप अब भी बरकरार है। और, इसी को देखते हुए इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चर हेरिटेज ने ये &lt;a href="http://www.amarujala.com/today/alhnews.asp?city=01ALD28M.asp"&gt;बैंक की इमारत को राष्ट्रीय धरोहर &lt;/a&gt;बनाने का प्रस्ताव इलाहाबाद बैंक के कोलकाता मुख्यालय को भेजा है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-3548344600829652282?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/3548344600829652282/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=3548344600829652282' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/3548344600829652282'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/3548344600829652282'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2008/05/blog-post_02.html' title='इलाहाबाद बैंक बनेगा राष्ट्रीय धरोहर'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-3098565369910974113</id><published>2008-05-02T09:15:00.004+05:30</published><updated>2008-05-02T09:20:51.001+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='बीजेपी'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='यज्ञदत्त शर्मा'/><title type='text'>यज्ञदत्त शर्मा तीसरी बार चुनाव जीते</title><content type='html'>यज्ञदत्त शर्मा इलाहाबाद झांसी शिक्षक स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीत गए हैं। ये उनकी &lt;a href="http://www.amarujala.com/today/alhnews.asp?city=01ALD28M.asp"&gt;लगातार तीसरी जीत &lt;/a&gt;है। यज्ञदत्त शर्मा को चूंकि मैं व्यक्तिगत तौर पर जानता हूं। इसलिए इस जीत की खुशी थोड़ा ज्यादा है। अभी मैं इलाहाबाद गया था तो, मिलित (यज्ञदत्तजी की बिटिया) दुबई से आई हुई थी। मिलित को बेटा हुआ है। और, मैं अपनी पत्नी के साथ मिलने गया था। शर्माजी तो प्रचार में थे मुलाकात नहीं हुई। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यज्ञदत्तजी लगातार तीन बार से विधायक हो रहे हैं लेकिन, कभी भी उनके घर जाने पर ऐसा नहीं लगा कि किसी वीआईपी के घर पहुंच गए हों। सामान्य जीवन शैली है। लोगों से संपर्क। इलाहाबाद-झांसी में शिक्षकों और स्नातकों से इतना सलीके से मेल मिलाप शायद ही किसा हो। और, यही वजह भी रही कि दूसरे प्रत्याशियों की काफी मशक्कत के बाद भी शर्माजी अच्छे अंतर से जीते। बीजेपी के दूसरे नेताओं को उनसे कुछ सीखना चाहिए। उन्हें ढेर सारी बधाई।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-3098565369910974113?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/3098565369910974113/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=3098565369910974113' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/3098565369910974113'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/3098565369910974113'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2008/05/blog-post.html' title='यज्ञदत्त शर्मा तीसरी बार चुनाव जीते'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-2630478417835553621</id><published>2008-04-17T14:23:00.003+05:30</published><updated>2008-04-17T14:34:13.192+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='mayawati'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='up election'/><title type='text'>2009 के लोकसभा चुनाव में मायावती को 35-45 सीट मिलेगी</title><content type='html'>मायावती के मस्त हाथी की चाल के आगे सबको रास्ता छोड़ना पड़ा। &lt;a href="http://batangad.blogspot.com/2007/11/blog-post_27.html"&gt;उत्तर प्रदेश के आधार के भरोसे &lt;/a&gt;दिल्ली फतह करने का इरादा रखने वाली मायावती को राज्य के उपचुनावों ने और बल दिया होगा। आजमगढ़ लोकसभा सीट से बसपा के अकबर अहमद डंपी ने भाजपा के टिकट पर लड़े दागी रमाकांत यादव को 54 हजार से ज्यादा मतो से हरा दिया। डंपी ने इससे पहले भी बसपा के ही टिकट पर रमाकांत यादव को हराया था। ये अलग बात है कि 1998 के लोकसभा चुनाव में रमाकांत सपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। उत्तर प्रदेश में भाजपा की हालत किसी गंभीर रोग से ग्रसित मरीज के लिए दी जाने वाली आखिरी दवा के रिएक्शन (उल्टा असर) कर जाने जैसी हो गई है। राजनाथ सिंह ने कैडर, कार्यकर्ताओं को दरकिनारकर चुनाव एक लोकसभा सीट जीतने के लिए रमाकांत जैसे दागी को टिकट दिया लेकिन, फॉर्मूला फ्लॉप हो गया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दूसरी लोकसभा सीट भी बसपा की ही झोली में गई है। खलीलाबाद लोकसभा सीट से भीष्मशंकर तिवारी ने 64,344 मतों से सपा के भालचंद्र यादव को हरा दिया है। भीष्मशंकर (कुशल तिवारी) लोकसभा तक पहुंचने में कामयाब हो गए। खलीलाबाद लोकसभा सीट पर भाजपा चौथे नंबर पर चली गई है। भीष्मशंकर, चतुर राजनीतिज्ञ हरिशंकर तिवारी के बड़े बेटे हैं। और, इससे पहले 1998 में भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव हार चुके हैं। हरिशंकर के छोटे बेटे विनय शंकर तिवारी इससे पहले बसपा के ही टिकट पर बलिया लोकसभा उपचुनाव हार चुके हैं। ये अलग बात है कि बलिया में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय &lt;a href="http://batangad.blogspot.com/2007/11/blog-post_27.html"&gt;चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर की जीत &lt;/a&gt;पूरी तरह से भावनात्मक जीत थी। सबसे दिलचस्प बात ये है कि विधानसभा चुनाव में खुद हरिशंकर तिवारी अपनी परंपरागत चिल्लूपार विधानसभा सीट बसपा के ही राजेश तिवारी के हाथों गंवाकर दशकों बाद पहली बार विधानसभा में जाने से रोक दिए गए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;विधानसभा सीटों में भी हाथी ने सबको रौंद दिया है। तीनो उपचुनाव के संकेत दिखा रहे हैं कि बसपा के बाद चल रही सपा से भी फासला बढ़ा है। भाजपा तो, तीसरे-चौथे नंबर पर पहुंच गई है। भाजपा बिलग्राम में तीसरे और कर्नलगंज में चौथे नंबर पर रही है। जबकि, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद की मुरादनगर सीट पर तो, चौथे नंबर पर भी उसे जगह नहीं मिल सकी हैं। इस सीट पर लोकदल के अयूब खां दूसरे नंबर पर हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मैंने अभी कुछ दिन पहले भी लिखा था कि उत्तर प्रदेश में अब तक विधानसभा चुनाव के समय के समीकरण बदले नहीं हैं। और, उत्तर प्रदेश की तीन विधानसभा और दो लोकसभा सीटों पर बसपा के जोरदार कब्जे से ये साफ भी हो गया है। भाजपा आजमगढ़ को छोड़कर सभी जगह तीसरे नंबर पर रही है। मायावती के तानाशाही रवैये का हवाला देकर प्रदेश में मायावती के विरोधी ये कहने लगे थे कि अब जनता मायाराज के खिलाफ हो रहा है लेकिन, सच्चाई यही है कि मायाजाल बढ़ता ही जा रही है। और, अब तो इस बात की कोई गुंजाइश नहीं रह गई है कि &lt;a href="http://batangad.blogspot.com/2008/04/blog-post.html"&gt;लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय की चाभी उसी को मिलेगी जिसको मायावती का साथ मिले। &lt;/a&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव&lt;br /&gt;अकबर अहमद डंपी (बसपा)- 2,27,340 मत&lt;br /&gt;रमाकांत यादव (भाजपा)- 1,73,089 मत&lt;br /&gt;बलराम यादव (सपा)- 1,56,621 मत&lt;br /&gt;एहसान खां (कांग्रेस)- 11,210 मत&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;खलीलाबाद लोकसभा उपचुनाव&lt;br /&gt;भीष्म शंकर तिवारी (बसपा)- 2,18,393 मत&lt;br /&gt;भालचंद्र यादव (सपा)- 1,53,761 मत&lt;br /&gt;संजय जायसवाल (कांग्रेस)- 94,565 मत&lt;br /&gt;चंद्रशेखर पांडे (भाजपा)- 60,384 मत&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बिलग्राम विधानसभा उपचुनाव&lt;br /&gt;रजनी तिवारी (बसपा)- 92,196 मत&lt;br /&gt;विश्राम यादव (सपा)- 54,088 मत&lt;br /&gt;यदुनंदन लाल (भाजपा)- 8,168 मत&lt;br /&gt;सुरेश चंद्र तिवारी (कांग्रेस)- 2,766 मत&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कर्नलंगज विधानसभा उपचुनाव&lt;br /&gt;बृज कुंवरि सिंह (बसपा)- 50,283 मत&lt;br /&gt;योगेश प्रताप सिंह (सपा)- 40,546 मत&lt;br /&gt;रामा मिश्रा (कांग्रेस)- 21,478 मत&lt;br /&gt;कृष्ण कुमार (भाजपा)- 4,387 मत&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुरादनगर विधानसभा उपचुनाव&lt;br /&gt;राजपाल त्यागी (बसपा)- 58,687 मत&lt;br /&gt;अयूब खां (लोकदल)- 51,834 मत&lt;br /&gt;मनीष (सपा)- 12,850 मत&lt;br /&gt;प्रदीप त्यागी (कांग्रेस)- 5,030 मत&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-2630478417835553621?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/2630478417835553621/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=2630478417835553621' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/2630478417835553621'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/2630478417835553621'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2008/04/2009-35-45.html' title='2009 के लोकसभा चुनाव में मायावती को 35-45 सीट मिलेगी'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-5055716921031835730</id><published>2008-04-02T20:11:00.007+05:30</published><updated>2008-04-02T20:38:47.719+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='mayawati'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='press'/><title type='text'>मायावती के ठसके से बदलते राजनीतिक समीकरण</title><content type='html'>अब मायावती कुछ भी प्रेस कांफ्रेंस करके बोलती हैं। मायावती ने आज फिर प्रेस कांफ्रेंस कर डाली। एक नहीं दो-दो वजहें थीं। टिकैत की गिरफ्तारी या सरकार के साथ अंदर ही अंदर हुए समझौते पर सफाई देनी थी । साथ ही अपने खिलाफ आय से ज्यादा संपत्ति के मामले में विरोधियों पर साजिश का आरोप लगाना था पने चिरपरिचित अंदाज में मायावती आईं और रुक-रुककर अच्छे से तैयार की गई स्क्रिप्ट पढ़ डाली। इससे लोकसभा चुनावों के लिए और उसके बाद सरकार बनने के समीकरण भी काफी हद तक साफ हो गए। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस के जरिए ही सबको बताने, खासकर अपने वोटबैंक को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि, कोई भी कितना बड़ा आदमी हो, उनके राज में दलितों को गाली देकर को बच नहीं सकता। टिकैत के माफी मांगने को उन्होंने जोर देकर बताया और इसी बहाने कांग्रेस पर जमकर निशाना भी साधा। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनसे इस्तीफा मांगा तो, केंद्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति के आयोग बूटा सिंह पर आरोप लगा डाला कि उनके खिलाफ अपशब्दों के इस्तेमाल के मामले में बूटा सिंह ने कांग्रेस के दबाव में काम किया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वैसे राहुल गांधी के उत्तर प्रदेश में जरूरत से ज्यादा रुचि दिखाने से मायावती पहले से ही चिढ़ी हैं और कुल मिलाकर पिछले तीन दिनों की घटनाओं ने लोकसभा चुनावों के लिए &lt;a href="http://batangad.blogspot.com/2008/04/blog-post.html"&gt;सबको अपने-अपने सहयोगियों को चुनने का मौका &lt;/a&gt;दे दिया है। भाजपा को फिर 'माया' रास आ रही है। और, उत्तर प्रदेश में बसपा के राज में डरे कार्यकर्ताओं के साथ मुलायम की सपा लेफ्ट का सहारा लेकर धीरे से कांग्रेस के पाले में जा रही है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-5055716921031835730?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/5055716921031835730/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=5055716921031835730' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/5055716921031835730'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/5055716921031835730'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2008/04/blog-post.html' title='मायावती के ठसके से बदलते राजनीतिक समीकरण'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-7045869817714958572</id><published>2008-03-06T05:52:00.003+05:30</published><updated>2008-03-06T06:03:15.875+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='छात्रसंघ चुनाव'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मायावती'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='student union'/><title type='text'>उत्तर प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव को माया मैडम की हरी झंडी</title><content type='html'>उत्तर प्रदेश में छात्रसंघ चुनावों से प्रतिबंध हट गया है। मायावती को लगा कि सपा छात्रसंघ चुनाव की बहाली के बहाने राज्य में युवाओं में अपना आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसी डर से आखिरकार मायावती ने छात्रसंघ चुनाव पर रोक हटा दी है। मैंने इससे पहले एक लेख लिखा था कि किस तरह से इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान &lt;a href="http://updiary.blogspot.com/2008/02/blog-post_21.html"&gt;छात्रों की शख्सियत में राजनीतिक गंभीरता&lt;/a&gt; अपने आप समाहित हो जाती है। इस पर अनिलजी और घुघूती जी की जो टिप्पणियां आईं। उसे मैं यहां डाल रहा हूं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://diaryofanindian.blogspot.com/"&gt;अनिल रघुराज&lt;/a&gt; said... &lt;br /&gt;विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान हर छात्र को किसी न किसी छात्र संगठन से ज़रूर जुड़ना चाहिए। एकदम सही बात कही आपने। लेकिन हमारी मुख्यमंत्री माया मेमसाहब तो छात्र राजनीति को ही समाप्त करने पर अड़ी हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://ghughutibasuti.blogspot.com/"&gt;Mired Mirage&lt;/a&gt; said... &lt;br /&gt;यह लेख बहुत ग्यानवर्धक रहा व मुझ जैसे लोगों, जिनका राजनीति से कोई दूर का नाता भी नहीं रहा, को भी इस विषय पर सोचने को बाध्य करता है । &lt;br /&gt;घुघूती बासूती&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब मायावती ने छात्रसंघ चुनाव पर से रोक तो हटा दी। लेकिन, ये विश्वविद्यालयों के साथ ही छात्रों को भी देखना होगा कि उनके चुने नेता ऐसा (कु)कर्म न करने लगें कि फिर से राज्य की सत्ता चलाने वालों को लोकतंत्र की शुरुआती कक्षाओं को बंद करने का मौका मिल जाए।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-7045869817714958572?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/7045869817714958572/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=7045869817714958572' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/7045869817714958572'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/7045869817714958572'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2008/03/blog-post.html' title='उत्तर प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव को माया मैडम की हरी झंडी'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-774805682069283111</id><published>2008-02-21T05:31:00.001+05:30</published><updated>2008-04-27T12:03:24.793+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='इलाहाबाद'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='छात्रसंघ चुनाव'/><title type='text'>लोकतंत्र की सबसे मजबूत पाठशाला है इलाहाबाद विश्वविद्यालय</title><content type='html'>( इलाहाबाद विश्वविद्यालय का पहला अंतराष्ट्रीय पुरातन छात्र सम्मेलन 16-17-18 फरवरी को हुआ। किसी वजह से इसमें मैं जा नहीं पाया। इस पुरातन छात्र सम्मेलन की पत्रिका के लिए मुझसे भी विश्वविद्यालय में मेरे विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दिनों के बारे में लेख मांगा गया था। जो, विश्वविद्यालय की पत्रिका में छपा है। अब तक मेरे पास पत्रिका आई नहीं है, इसलिए वो पत्रिका नहीं दिखा पा रहा हूं। मैं यहां वो लेख वैसे का वैसा ही छाप रहा हूं। ये लेख इस बात पर भी मेरे विचार हैं कि पढ़ाई के साथ छात्र राजनीति कितनी सही है।) &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पढ़ाई हमेशा अच्छे भविष्य और मजबूत व्यक्तित्व की बुनियाद होती है। और, मैंने जो, इलाहाबाद विश्वविद्यालय की अपनी पढ़ाई के दौरान पाया कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों का गजब का व्यक्तित्व विकास होता है। मैं आज जो कुछ भी हूं उसका बड़ा योगदान इलाहाबाद विश्वविद्यालय में मेरे पढ़ाई के 7 साल रहे हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मैंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कोई भी चुनाव नहीं लड़ा। लेकिन, पढ़ाई के दौरान छात्रसंघ चुनावों में सक्रिय हिस्सेदारी की वजह से मैं उन्हीं दिनों देश की संसदीय परंपरा से भली-भांति वाकिफ हो गया था। 1993-2000, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के उस संक्रमण काल के आखिरी दौर में गिना जा सकता है जिसकी एक दशक पहले शुरुआत हुई थी। उस समय तक सत्र देरी से चल रहे थे। विश्वविद्यालय में पढ़ाई का सत्र तो देरी से चल ही रहा था। छात्रसंघ के चुनाव भी समय पर नहीं हो रहे थे। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPCS) के भी 3-3 पुराने सत्रों के परिणाम एक के बाद एक आ रहे थे। यानी, इलाहाबाद विश्वविद्यालय से डिग्री लेकर आगे की योजना बनाने वाले छात्र-छात्राएं, चुनाव लड़कर-जीतकर आगे संसद-विधानसभा का रुख करने की चाहत रखने वाले छात्रनेता और IAS-PCS बनकर किसी जिले में अपनी काबिलियत दिखाने की हसरत रखने वाले छात्र सभी के लिए ये संक्रमण काल था। उस समय ये बात ज्यादा समझ में नहीं आती थी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;खैर, 1996 के बाद से सत्र धीरे-धीरे फिर पटरी पर आने लगे थे। 1998 में शायद ही कोई सत्र लेट रहा हो। 6 महीने के कार्यवाहक कुलपति प्रोफेसर वी डी गुप्ता और उसके बाद आए कुलपति प्रोफेसर चुन्नीलाल क्षेत्रपाल ने विश्वविद्यालय को पटरी पर लाने के लिए कड़े फैसले लिए। बीस-बीस सालों से छात्रावस के कमरे में कब्जा जमाए बैठे बूढ़े छात्रों को कमरों से बाहर निकालकर नए छात्रों को मेरिट के आधार पर कमरे मिलने लगे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक वाकया जो मुझे याद आ रहा है। विश्वविद्यालय में सत्र की देरी से परेशान छात्रों और छात्रनेताओं का एक वर्ग इस बात के लिए पूरी तरह से मन बना चुका था कि अब किसी भी कीमत पर परीक्षा में देरी नहीं होने दी जाएगी। प्रोफेसर चुन्नी लाल क्षेत्रपाल भी इस फैसले पर मजबूत बना चुके थे कि परीक्षा नहीं टाली जाएगी चाहे जो, हो। लेकिन, सस्ती लोकप्रियता के लिए छात्रनेता, छात्रों के एक वर्ग ने कुलपति पर विधि की परीक्षाएं फिर से टालने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद परीक्षा विरोधी और परीक्षा समर्थक खेमों ने विश्वविद्यालय परिसर में रजिस्ट्रार ऑफिस के सामने अगल-बगल ही मंच लगाकर भाषण करना शुरू कर दिया। भाषण का दुखद अंत मारपीट के साथ हुआ लेकिन, परिणाम सुखद ये रहा कि परीक्षा नियत समय पर ही हुई।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;खैर, लोक सेवा आयोग चौराहा और यूनिवर्सिटी के सामने से साइंस फैकल्टी तक जाने वाली सड़क पर आए दिन धरना प्रदर्शन आम बात थी। लेकिन, एक बात जो मुझे सबसे ज्यादा अपील करती थी कि कहीं भी किसी धरना प्रदर्शन में मुझे ये याद नहीं आ रहा है कि कहीं भी छात्रों ने आंदोलन के दौरान आम लोगों को परेशान किया हो। यही वजह है कि इलाहाबाद अकेला शहर होगा जहां, परिवारों से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र आंदोलनों को मदद मिलती रही है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बूढ़े-बुजुर्ग (कहलाते सब छात्रनेता ही थे) नेता परिसर में छात्रों के हितों का बीड़ा उठाए घूमते थे। लेकिन, मुझे अपने समय में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रनेताओं की एक अच्छी बात ये थी कि दुर्गुणों (शराब, सिगरेट, अपराध) का आरोप शायद ही किसी छात्रनेता पर लगा हो। परिसर में एक साथ अगर 10-12 नौजवानों के बीच में कोई एक खद्दरधारी घूम रहा है तो, आसानी से समझ में आ जाता था कि कोई छात्रनेता चल रहा है। और, अगर एक ही उम्र के ढेर सारे लड़के चुहल करते घूम रहे हैं और किसी एक लड़के के लिए बीच-बीच में नारे भी लगा रहे हैं तो, मतलब साफ है अगले चुनाव के लिए एक नया छात्रनेता तैयार हो रहा है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;चुनाव और परीक्षा के सत्र में देरी की वजह से 1995 के चुनाव तक ज्यादा बुजुर्ग हो चुके छात्रनेताओं (35-45 साल) के बीच नए छात्रनेताओं (20-28 साल) की भी पूरी जमात तैयार हो चुकी थी। उस समय ये भी चर्चा शुरू हो गई थी कि छात्रसंघ चुनाव लड़ने की उम्रसीमा अधिकतम 28 साल होनी चाहिए। मुझे याद है गोरखपुर में 25 साल की उम्रसीमा लागू की गई तो, वहां के छात्रसंघ के महामंत्री जो, अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ना चाहते थे, उम्रसीमा में थोड़ी छूट के लिए इलाहाबाद उच्चन्यायालय में याचिका दाखिल करने आए थे। उनकी उम्र 26 साल हो चुकी थी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यालय के नीचे खड़े होकर वो पान खा रहे थे कि तभी इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्यक्ष का चुनाव लड़ने वाले 2 (40 साल के ऊपर के) बुजुर्ग छात्रनेता वहां आ गए। उनको देखने के बाद गोरखपुर से उम्रसीमा में छूट के लिए आए छात्रनेता ने चुनाव लड़ने का इरादा त्याग दिया और बिना याचिका दाखिल किए ही लौट गए। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इलाहाबाद विश्वविद्यालय में किसी के छात्रनेता बनने की भी शुरुआत बड़े रोचक तरीके से होती थी। पिछले चुनाव मे किसी छात्रनेता के पीछे की सबसे सक्रिय मंडली में से किसी एक को अगला चुनाव लड़ाने की तैयारी हो जाती थी। तर्क ये कि जब हम पुराने छात्रनेता के लिए 100 वोट जुटा सकते हैं तो, अपने साथी के लिए तो, 500 वोट जुटा ही लेंगे। कुछ इसी तरह से हम लोगों की 40-50 लोगों की एक जबरदस्त छात्रों की मंडली (इसमें मेरे जैसे इलाहाबाद में अपने घर में रहने वाले और बाहर के जिले, प्रदेश से आकर छात्रावास या डेलीगेसी में रहने वाले छात्र थे।) ने भी अपने साथ के मनीष शुक्ला को चुनाव लड़ा दिया। मनीष बाद में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बैनर से चुनाव लड़े और फिर बहुत ही कम समय में भारतीय जनता युवा मोर्चा के रास्ते जौनपुर की खुटहन विधानसभा का चुनाव लड़ा। कुछ यही तरीका होता है इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रनेता के चुने जाने का। यानी एकदम लोकतांत्रिक तरीका।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इलाहाबाद को लोकतंत्र की मैं सबसे मजबूत पाठशाला कह रहा हूं तो, इसके पीछे वहां के छात्रों के चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने और अपना नेता चुनकर उसे जिताने तक की बात कर रहा हूं। दिल्ली के जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय के अलावा इलाहाबाद विश्वविद्यालय देश का अकेला विश्वविद्यालय होगा जहां, आमने-सामने छात्र नेताओं के मंच लगते हैं। स्थानीय मुद्दों से ज्यादा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बहस होती है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;विश्वविद्यालय मार्ग पर चुनाव के एक दिन पहले लगने वाले ये मंच नेता की जीत-हार का पैमाना तय करते हैं। छात्रनेता के समर्थन में पुराने-नए छात्रनेता, पूर्व पदाधिकारी आकर भाषण देते हैं और माना जाता था कि जिसका मंच सबसे बाद तक टिका रहता उसका चुनाव जीतना लगभग तय हो जाता था। जैसे किसी लोकसभा चुनाव में नेता के पक्ष में राष्ट्रीय, राज्य के नेताओं की मीटिंग होती है ठीक वैसे इलाहाबाद में दिल्ली, जेएनयू, बीएचयू या प्रदेश के दूसरे विश्वविद्यालयों के छात्रसंघ पदाधिकारी भी अपने प्रत्याशियों के प्रचार में आते थे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इलाहाबाद की लोकतंत्र की पाठशाला की एक और अद्भुत बात जो, मैं जोड़ रहा हूं वो, हैं यहां के छात्रसंघ चुनाव में निकलने वाला मशाल जुलूस। मशाल जुलूस विश्वविद्यालय मार्ग पर लगे मंचों से नेताओं का भाषण खत्म होने के बाद शुरू होता था। फिर समर्थ प्रत्याशी अपने चुनाव कार्यालय से बांस की खपची, जला तेल, कपड़ा और मिट्टी से बनी कुप्पी जैसी मशाल लेकर निकलते थे। हर प्रत्याशी के जुलूस के बीच में दो ट्रॉली पर अतिरिक्त जला तेल होता था जो, बुझती मशाल को आखिर तक जलाए रखने में मदद करता था। ये मशाल जुलूस अगली सुबह होने वाली चुनाव की दिशा तो तय करता ही थी। लड़कों के लिए ये महिला छात्रावास में बिना रोक घुसने का एक लाइसेंस भी था। लड़कियों के छात्रावास के दरवाजे खुले होते थे। अपने से तय नियम के मुताबिक, एक-एक जुलूस अंदर जाते थे और लड़कियों की ओर से फेंकी गई फूल-मालाओं के साथ थोड़ा और उत्साह से भरकर वापस आ जाते थे। वैसे, ये परंपरा इलाहाबाद में जसबीर सिंह के एसपी सिटी रहने के समय पहले आरएएफ के घेरे में बंधी फिर टूट गई। वैसे, मैंने उद्दंड से उद्दंड छात्रों को भी कभी इस दौरान लड़कियों के छात्रावास में कोई बद्तमीजी करते नहीं देखा था। लोकतंत्र की एक और बेहतर मिसाल। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इलाहाबाद विश्वविद्यालय में चुनाव लड़ने वाले छात्रनेता का चुनाव क्षेत्र एक संसदीय क्षेत्र से भी बड़ा होता है। मेरा घर इलाहाबाद में है। लेकिन, मैंने इलाहाबाद की गलियों को, मोहल्लों को नजदीक से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के चुनावों के दौरान ही देखा। परिसर के मुद्दों के अलावा जाति, क्षेत्र, छात्रावास, डेलीगेसी इन सभी मुद्दों पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र नेताओं को बैलेंस करके चुनाव जीतना होता था। इलाहाबाद में मेरे समय में दक्षिणपंथी छात्र संगठन और वामपंथी छात्र संगठन दोनों ही काफी सक्रिय रहते थे। वामपंथी छात्र संगठनों की वोटों की मामले स्थिति काफी पतली रहती थी जबकि, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मेरे समय में बहुत ही मजबूत स्थिति में था। लेकिन, सेमिनार, धरना-प्रदर्शन पर हर तरह के छात्र संगठनों की मौजूदगी परिसर और परिसर के बाहर निरंतर बनी रहती थी। इस सबके बावजूद आज संसदीय चुनावों को बेहतर करने के लिए जिस बात की सबसे ज्यादा वकालत की जा रही है वो, मेरे समय में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में खुद ही चल रही व्यवस्था का हिस्सा बन गया था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बैनर कभी चुनाव नहीं जिता पाता था। मजबूत व्यक्तित्व चुनाव जीतने की पहली शर्त होता था। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान मिलने अनुभवों के आधार पर ही मेरा ये मजबूत विश्वास है कि पढ़ाई के दौरान हर लड़के-लड़की को किसी न किसी छात्र संगठन से जरूर जुड़ना चाहिए। भले ही वो राइटिस्ट हो, लेफ्टिस्ट हो या फिर सोशलिस्ट हो। क्योंकि, किसी छात्र संगठन में काम करने से सोचने और किसी बात पर प्रतिक्रिया देने की जो आदत बनती है वो, ताउम्र जिंदगी का अहसास दिलाती रहती है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;छात्रसंघ चुनावों के नोटीफिकेशन के साथ ही परिसर में न्यासी मंडल के आदेश ही काम करते थे। छात्रसंघ चुनाव कब होंगे, कितने दिनों तक प्रचार हो सकेगा। प्रत्याशी के लिए आदर्श आचार संहिता क्या होगी, ये सब तय करना न्यासी मंडल का काम होता था। न्यासी मंडल का अध्यक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त जैसी भूमिका में होता था। प्रोफेसर जी के राय को इस बात का जबरदस्त अनुभव है क्योंकि, 1995 के बाद से वो लगातार इस कुर्सी को संभाले हुए हैं। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महामंत्री, उपमंत्री और प्रकाशनमंत्री संसद के मंत्रिमंडल जैसे माने जा सकते हैं जिनका सीधा चुनाव होता है और छात्रावास तथा डेलीगेसी से चुने जाने वाले सदस्य विश्वविद्यालय की संसद के संसद सदस्य जैसे होते हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;छात्रसंघ चुनावों के दौरान होने वाल भाषणों से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों के आत्मविश्वास का अंदाजा लगाया जा सकता है। उस समय हर दूसरा वक्ता चुनाव में इस बात का जिक्र जरूर करता था कि जैसे पंजाब में गेहूं की फसल होती है वैसे ही इलाहाबाद विश्वविद्यालय से IAS, PCS निकलते हैं। इतना ही नहीं ये भी जरूर गिनाया जाता था कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने देश को कई प्रधानमंत्री, कैबिनेट मंत्री, राज्यपाल और एक से बढ़कर एक विद्वान, साहित्यकार, पत्रकार दिए हैं। लेकिन, इसी गुमान में विश्वविद्यालय में एक जो सबसे खराब बात हुई थी कि ये विश्वविद्यालय बदलते भारत के साथ खुद को बदल नहीं रहा था। नॉसट्रैल्जिया में जी रहा था। लेकिन, हमारे विश्वविद्यालय से निकलते-निकलते विश्वविद्यालय में सुधार की प्रक्रिया का पहला चरण लगभग पूरा हो चुका था। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;विश्वविद्यालय में इसके पहले भी पुरातन छात्र सम्मेलन होते रहे हैं। लेकिन, 16 से 18 फरवरी तक ये विश्वविद्यालय का पहला अंतरराष्ट्रीय पुरा छात्र सम्मेलन हुआ है। शायद इस मामले में भी ये पहला होगा कि इस बार कोई बुजुर्ग छात्रसंघ अध्यक्ष, महामंत्री पुरा छात्र सम्मेलन का इस्तेमाल अपने राजनीतिक करियर को दुरुस्त करने के लिए नहीं कर रहे हैं। बल्कि, ये पुरा छात्र सम्मेलन इस विश्वविद्यालय को उन दिनों की याद दिलाएगा जब ये देश में ऑक्सफोर्ड का प्रतिमान विश्वविद्यालय माना जाता था। वैसे ये प्रतिमान मेरे जैसों को तब भी बुरा लगता था, अब भी बुरा लगता है। क्योंकि, मेरा मानना है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में वो सारी काबिलियत है जिसके बूते ऑक्सफोर्ड और कैंब्रिज को इस विश्वविद्यालय से उपमा लेनी पड़े। और, ये पुरातन छात्र सम्मेलन इस आंदोलन की शुरुआत हो सकती है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;विश्वविद्यालय के अब के कुलपित प्रोफेसर राजेन हर्षे से मेरी जो एक मुलाकात हुई है और जो उनके बारे में मेरी राय बनी है वो, ये कि प्रोफेसर हर्षे किसी भी तरह सबसे पहले विश्वविद्यालय की माली हालत ठीक करना चाहते हैं। आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। यही वजह है कि विश्वविद्यालय में ढेर सारे नए वोकेशनल कोर्सेज शुरू हो चुके हैं। जो, विश्वविद्यालय के बदलते भारत यानी यंग इंडिया के साथ कदम मिलाने का संकेत दे रहा है। मैं उम्मीद करता हूं कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय का बंद पड़ा जर्नलिज्म डिपार्टमेंट भी जल्द ही शुरू हो सकेगा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रोफेसर हर्षे से बस मेरा एक अनुरोध है कि वो, इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ को भारतीय लोकतंत्र की मजबूत पाठशाला बने रहने के लिए भी जरूरी फैसले लें। पढ़ाई में राजनीति का घालमेल नहीं होना चाहिए। लेकिन, दुनिया के दूसरे सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश को चलाने वाले नेता अच्छी पढ़ाई करेंगे और लोकतंत्र के सबक अच्छे से सीखेंगे तभी वो, अच्छे नेता बन सकेंगे। इसके लिए जरूरी पहल इलाहाबाद विश्वविद्यालय जैसे परिसरों से ही हो सकती है। और, प्रोफेसर हर्षे जैसे विजनरी कुलपति ही पढ़ाई और राजनीति दोनों में बेहतर तालमेल का फॉर्मूला तलाश सकते हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-774805682069283111?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/774805682069283111/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=774805682069283111' title='6 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/774805682069283111'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/774805682069283111'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2008/02/blog-post_21.html' title='लोकतंत्र की सबसे मजबूत पाठशाला है इलाहाबाद विश्वविद्यालय'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>6</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-4965314737249511926</id><published>2008-02-16T06:31:00.002+05:30</published><updated>2008-02-16T06:36:12.253+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='employment'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Uttar Pradesh'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='industry'/><title type='text'>चलो अब यूपी के लोगों को दूसरे राज्य में पिटने नहीं जाना पड़ेगा</title><content type='html'>देश के बीमारू राज्यों में अगुवा उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए इससे अच्छी खबर नहीं हो सकती है। ASSOCHAM को अब उत्तर प्रदेश में संभावनाएं दिख रही हैं। देश के दो सबसे बड़े उद्योग संगठनों में से एक ASSOCHAM की ताजा स्टडी रिपोर्ट कह रही है कि उत्तर प्रदेश उद्योगों के लिहाज से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्लेटफॉर्म बन सकता है। लेकिन, ASSOCHAM को सबसे बड़ी समस्या implementation की ही लग रही है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ASSOCHAM ने जो स्टडी की है, उसका नाम रखा है "Uttar Pradesh: a rainbow of opportunities". ASSOCHAM की रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत राज्य का मानव संसाधन और जमीन को बताया गया है। ASSOCHAM के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत के मुताबिक, राज्य में मेन्युफैक्चरिंग की विकास दर 10.5 और खेती में 4 प्रतिशत की विकास दर होनी चाहिए। राज्य में देश की 17 प्रतिशत आबादी रहती है। साथ ही देश की कुल खेती की जमीन में से 11.8 % खेती की जमीन उत्तर प्रदेश ही है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ASSOCHAM का कहना है कि विकास की ये रफ्तार पाने के लिए राज्य में 50,000 करोड़ रुपे का निवेश होगा। उत्तर प्रदेश में IT और ITES सर्विसेज आसानी से डेवलप की जा सकती है। इन उद्योगों से राज्य हर साल 5,000 करोड़ रुपए की IT सर्विसेज निर्यात कर सकता है। और, इन्हीं दोनों इंडस्ट्री में ही राज्य में 2010 तक 8 लाख नई नौकरियों के आने की उम्मीद है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ASSOCHAM की रिपोर्ट के मुताबिक, IT, ITES के अलावा करीब एक दर्जन क्षेत्र और हैं जिसमें राज्य तेजी से तरक्की कर सकता है। इन सेक्टर्स में राज्य में करीब दो लाख करोड़ रुपए का निवेश होने की उम्मीद है। और, 2010 तक ये सेक्टर्स UP में 25 लाख लोगों को नौकरी देंगे। ये खास सेक्टर्स हैं फूड प्रॉसेसिंग, एग्रो बेस्ड इंडस्ट्रीज, हेवी इंजीनियरिंग, पेट्रोकेमिकल, रियल इस्टेट, रिटेल, एक्सप्रेसवेज, टेक्सटाइल-कॉटन और सिल्क और चीनी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जब राज्य में मायावती की सरकार बनी थी। उस पर जुलाई महीने में ही मैंने &lt;a href="http://batangad.blogspot.com/2007/07/blog-post_25.html"&gt;उत्तर प्रदेश में राजनीति के जरिए विकास का गणित&lt;/a&gt; नाम से एक पोस्ट लिखी थी। जिसमें मैंने साफ लिखा था कि उत्तर प्रदेश मानव संसाधन और एग्री बेस्ड इंडस्ट्री के मामले में देश का सिरमौर बन सकता है। अब यही बात ASSOCHAM की रिपोर्ट भी कह रही है। बस सवाल सिर्फ ये है कि क्या मायावती की सरकार इतने बड़े विकास के लिए तैयार है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-4965314737249511926?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/4965314737249511926/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=4965314737249511926' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/4965314737249511926'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/4965314737249511926'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2008/02/blog-post_16.html' title='चलो अब यूपी के लोगों को दूसरे राज्य में पिटने नहीं जाना पड़ेगा'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-2739367573888548922</id><published>2008-02-09T19:23:00.000+05:30</published><updated>2008-02-09T19:34:15.882+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='allahabad'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='university'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='alumni convention'/><title type='text'>इलाहाबाद विश्वविद्यालय का पहला अंतरराष्ट्रीय पुरातन छात्र सम्मेलन</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_JjdjlOPhD0w/R62ylC0Z-FI/AAAAAAAAAEA/V4GpGpYBbjg/s1600-h/alumni"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://1.bp.blogspot.com/_JjdjlOPhD0w/R62ylC0Z-FI/AAAAAAAAAEA/V4GpGpYBbjg/s320/alumni" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5164980697145407570" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;देश के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक इलाहाबाद विश्वविद्यालय 121 साल का हो गया है। 23 सितंबर 1887 को इस विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी। दुनिया भर में प्रतिष्ठित इलाहाबाद विश्वविद्यालय पहली बार अंतरराष्ट्रीय पुरातन छात्र सम्मेलन बुला रहा है। दुनिया भर से ब्यूरोक्रैट, साइंटिस्ट, प्रोफेसर, नेता, पत्रकार, साहित्यकार पुरातन छात्र इस सम्मेलन में शामिल होंगे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;16, 17 और 18 फरवरी तीन दिनों तक ये अंतरराष्ट्रीय पुरातन छात्र सम्मेलन होगा। इसके मुख्य समारोह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सीनेट भवन में होंगे। इसके अलावा सभी विभाग और छात्रावासों के पुराने छात्रों का मिलन समारोह उनके विभाग और छात्रावास की ओर से ही आयोजित किए जाएंगे। एल्युमुनाई कन्वेंशन 2008 के 3 दिनों में कुल 5 बड़े सिंपोजियम होंगे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;शनिवार 16 फरवरी को उद्घाटन सत्र के बाद न्यायिक, कानूनी क्षेत्र से जुड़े लोगों का पहला सिंपोजियम होगा। इसमें सुप्रीमकोर्ट के कई न्यायाधीशों के अलावा इलाहाबाद उच्च न्यायालय और दूसरे राज्यों के उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, अधिवक्ता शामिल होंगे। 17 फरवरी 08 को तीन सत्र होने हैं। पहले सत्र में कला और साहित्य पर चर्चा होगी। दूसरे सत्र में विज्ञान-तकनीक और तीसरे सत्र में शिक्षा और राष्ट्रीय विकास पर चर्चा होगी। इसी दिन शाम को हॉस्टल कॉन्क्लेव का भी आयोजन किया जाएगा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आखिरी दिन 18 फरवरी 08 को आज के परिदृश्य में बुद्धिजीवियों, संस्थाओं और दूसरे संस्थानों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संदर्भों में किस तरह की भूमिका हो सकती है, इस पर चर्चा होगी। इसके बाद एक डेढ़ घंटे का ओपन हाउस होगा जिसमें इलाहाबाद विश्वविद्यालय और विश्वविद्यालय पुरातन छात्र संगठन इस बात पर चर्चा करेंगे कि विश्वविद्यालय की प्रगति में किस तरह से सहायक हुआ जा सकता है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एल्युमुनाई कन्वेंशन 2008 के सचिव डॉक्टर प्रशांत अग्रवाल हैं। इसमें शामिल होने के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र डॉक्टर अग्रवाल से agarwalprashant@hotmail.com  पर या विश्वविद्यालय की वेबसाइट www.allduniv.ac.in  के जरिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-2739367573888548922?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/2739367573888548922/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=2739367573888548922' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/2739367573888548922'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/2739367573888548922'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2008/02/blog-post_09.html' title='इलाहाबाद विश्वविद्यालय का पहला अंतरराष्ट्रीय पुरातन छात्र सम्मेलन'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_JjdjlOPhD0w/R62ylC0Z-FI/AAAAAAAAAEA/V4GpGpYBbjg/s72-c/alumni' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-8390714577161440837</id><published>2008-02-08T21:32:00.000+05:30</published><updated>2008-02-08T21:41:24.139+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='allahabad'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='media'/><title type='text'>.... और अब चाहिए कोडिफाइड मीडिया</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_JjdjlOPhD0w/R6xsD7-1gJI/AAAAAAAAAD4/k1H-VLMVzYo/s1600-h/bargad"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://3.bp.blogspot.com/_JjdjlOPhD0w/R6xsD7-1gJI/AAAAAAAAAD4/k1H-VLMVzYo/s320/bargad" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5164621687583768722" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सेन्टर ऑफ फोटो जर्नलिज्म एण्ड विजुअल कम्युनिकेशन, इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज की पत्रिका ‘बरगद’ का ताजा अंक मीडिया पर है। इस अंक में मीडिया का कोड ऑफ कंडक्ट होना चाहिए क्या। पत्रकारिता की नई प्रवृत्तियां बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समाचारों में सनसनी और टीआरपी की होड़, विशेषीकृत पत्रकारिता न तकनीकी लेखन, सिनेमा, क्रिकेट, क्राइम बनाम इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तथा मीडिया की भाषा कैसी होनी चाहिए विषय पर तीन दिन तक चली राष्ट्रीय संगोष्ठी का पूरा निचोड़ है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस गोष्ठी में केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के उपाध्यक्ष रामशरण जोशी, माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय, भोपाल के पूर्व कुलपति राधेश्याम शर्मा, सहारा टाइम्स के प्रमुख उदय सिन्हा, जामिया मिलिया, नई दिल्ली से प्रोफेसर हेमंत जोशी, एनडीटीवी, दिल्ली के समाचार संपादक प्रियदर्शन, वरिष्ठ टीवी पत्रकार मंजरी जोशी, नया ज्ञानोदय नई दिल्ली के संपादक रवींद्र कालिया, इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जी के राय और दूसरे कई मीडिया के दिग्गजों के साथ मुझे शामिल होने का मौका मिला था। मैंने &lt;a href="http://batangad.blogspot.com/2007/10/blog-post_26.html"&gt;कौन बनाए मीडिया का कोड ऑफ कंडक्ट&lt;/a&gt; विषय पर उद्घाटन सत्र में अपनी बात रखी थी। इस संगोष्ठी के संयोजक सेन्टर ऑफ फोटो जर्नलिज्म एण्ड विजुअल कम्युनिकेशन के अध्यापक और बरगद पत्रिका के प्रबंध संपादक धनंजय चोपड़ा थे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बरगद का ये अंक bargad@rediffmail.com प्रो जी के राय या धनंजय चोपड़ा के नाम मेल करके मंगाया जा सकता है। इसकी सहयोग राशि 10 रुपए है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-8390714577161440837?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/8390714577161440837/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=8390714577161440837' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/8390714577161440837'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/8390714577161440837'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2008/02/blog-post_08.html' title='.... और अब चाहिए कोडिफाइड मीडिया'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_JjdjlOPhD0w/R6xsD7-1gJI/AAAAAAAAAD4/k1H-VLMVzYo/s72-c/bargad' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-6857579407986754339</id><published>2008-02-06T19:46:00.001+05:30</published><updated>2008-02-06T19:54:58.555+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अतीक अहमद'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मायावती'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='उत्तर प्रदेश'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अपराध'/><title type='text'>मायावती सही कह रही थी क्या</title><content type='html'>दिल्ली पुलिस इन दिनों बड़े-बड़े कारनामे कर रही है। बड़े-बड़े भगोड़े बदमाशों को दिल्ली पुलिस धर दबोच रही है, सलाखों के पीछे पहुंचा दे रही है। खासकर उत्तर प्रदेश के भगोड़े बदमाशों के लिए तो दिल्ली पुलिस काल बन गई है। इधर की खबरों को देखकर पहली नजर में तो ऐसा ही लगता है। दो दशक से भगोड़े पांच लाख के इनामी बदमाश बृजेश सिंह के बाद इलाहाबाद का कुख्यात भगोड़ा माफिया सांसद भी दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में आ गया है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लेकिन, एक बड़ा इत्तफाक दिख रहा है जिससे सवाल भी खड़े हो सकते हैं कि आखिर उत्तर प्रदेश के अपराधी दिल्ली पुलिस की ही पकड़ में क्यों आ रहे हैं। बृजेश सिंह के भुवनेश्वर से पकड़े जाने के बाद जब अतीक अहमद दिल्ली से पकड़े गए तो, मुझे लगने लगा कि कहीं मायावती सही तो, नहीं कह रही थी। मायावती ने कुछ दिन पहले ही प्रेस कांफ्रेंस करके कहा था कि समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुना गया भगोड़ा सांसद अतीक अहमद उनकी हत्या करने की फिराक में हैं। और केंद्र की कांग्रेस सरकार उसकी मदद कर रही है। वैसे तो इतनी तगड़ी सिक्योरिटी में रहने वाली मुख्यमंत्री को कोई अपराधी कैसे मार सकता है। लेकिन, आरोप जब मुख्यमंत्री खुद लगा रही हो तो, उस पर कुछ तो यकीन करना ही पड़ता है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वैसे मायावती का अतीक से डरना बेवजह नहीं है। मायावती को लखनऊ के वीवीआईपी गेस्ट हाउस में समाजवादी पार्टी के रमाकांत, उमाकांत यादव और अतीक अहमद की बदसलूकी आज भी डराती होगी। वैसे जब मायावती ने अतीक से अपनी जान का खतरा बताया तो, पहले से ही उत्तर प्रदेश से भगोड़ा घोषित किए जा चुके अतीक की पुलिस मुठभेड़ में हत्या की आशंका बलवती हो गई। लेकिन, न तो कल्याण सिंह का जमाना था और न ही अतीक अहमद, शिव प्रकाश शुक्ला की तरफ सिर्फ अपराधी था। अतीक माननीय सांसद हैं और आने वाले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस, सपा के लिए काम की ताकत बन सकते हैं। अब अगर दिनदहाड़े हुई हत्या के बाद भी अतीक जैसा बदमाश मुस्कुराते हुए मुख्यमंत्री पर आरोप लगाकर मजे से जेल जा सकता है तो, मारे गए बीएसपी विधायक राजू पाल की विधवा पूजा पाल और राजू की मां रानी पाल का डरना तो बेवजह नहीं ही है। उनके पास तो मुख्यमंत्री जैसी सुरक्षा भी नहीं है। राजू पाल हत्याकांड में गवाह उमेश की तो जैसे सांस ही रुक गई है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अतीक का दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में आना कई सवाल खड़े करता है। क्या उत्तर प्रदेश पुलिस में अतीक का जाल इतना मजबूत हो चुका है कि अतीक की सारी बातचीत रिकॉर्ड होने के बाद भी पुलिस उसे पकड़ नहीं सकी। कहते हैं कि फरारी में अतीक ने 65 से ज्यादा सिमकार्ड इस्तेमाल किए। अतीक का भाई अशरफ और हमजा अभी भी पुलिस की पकड़ में नहीं आए हैं। साफ है माहौल ठीक होते ही ये दोनों भी दिल्ली पुलिस की गिरफ्त से यूपी की जेल में महफूज हो जाएंगे। अतीक ने दिल्ली पुलिस (मुझे साफ मिलीभगत लगती है) को खुद को सौंपने से पहले दिल्ली में टीवी चैनलों को जिस ठाट से इंटरव्यू दिया था वो, देखने लायक था। साफ दिख रहा था कि दिल्ली में किसी सांसद आवास पर इंटरव्यू दिया गया था। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक और बात छोटे-छोटे मामलों में आजकल पुलिस अपराधियों से सच उगलवाने के लिए नारको टेस्ट का सहारा लेने लगी है। फिर अतीक को इससे क्यों बख्शा जा रहा है। साफ है अगर बेहोशी में अतीक ने सारी सच्चाई उगली तो, राजू पाल का हत्यारा साबित होने के साथ वो कई बड़े नेताओं और उत्तर प्रदेश पुलिस के कई बड़े अफसरों को भी नाप लेगा। इलाहाबाद शहर और अतीक के संसदीय क्षेत्र फूलपुर में तो सबकी बोलती सी बंद हो गई है। सब कह रहे हैं कि जेल में बैठा अतीक तो अब वहीं से किसी की भी हत्या करवा सकता है। अब सोचिए कि मायावती क्या कर लेंगी अगर सपा और कांग्रेस दोनों को अतीक नेता लग रहे हैं अपराधी नहीं। मुझे तो लगता है कि मायावती सच ही कह रही हैं कि केंद्र की कांग्रेस सरकार भी अतीक की मदद कर रही है। और, अगले लोकसभा चुनाव में नेहरू-गांधी की विरासत की मलाई खा रही सोनिया अम्मा की कांग्रेस अतीक अहमद को नेहरू जी की लोकसभा सीट फूलपुर से अपना प्रत्याशी बना सकती है। जीतने में कोई दिक्कत तो है ही नहीं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-6857579407986754339?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/6857579407986754339/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=6857579407986754339' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/6857579407986754339'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/6857579407986754339'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2008/02/blog-post.html' title='मायावती सही कह रही थी क्या'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-9040716486004122994</id><published>2008-01-24T20:09:00.000+05:30</published><updated>2008-02-05T08:57:27.851+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='माफिया'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='उत्तर प्रदेश'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अपराध'/><title type='text'>उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा इनामी पकड़ में आने का मतलब</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_JjdjlOPhD0w/R6fXlr-1f7I/AAAAAAAAACI/elVJ-AnRU04/s1600-h/brijesh.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://1.bp.blogspot.com/_JjdjlOPhD0w/R6fXlr-1f7I/AAAAAAAAACI/elVJ-AnRU04/s320/brijesh.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5163332540264972210" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े इनामी माफिया को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। भुवनेश्वर के बिग बाजार के बाहर से धरे गए बृजेश सिंह पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने पांच लाख रुपए का इनाम रखा था। बृजेश बराबर का ही इनामी ददुआ डाकू था जिसे मायावती की सरकार बनने के बाद पुलिस ने बांदा के जंगलों में मार गिराया। लेकिन, करीब दो दशकों से सारी मशक्कत के बाद भी उत्तर प्रदेश पुलिस को बृजेश सिंह का सुराग तक नहीं मिल सका। अब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बृजेश सिंह को खोज निकाला है। गायब रहकर भी पूर्वी उत्तर प्रदेश में बृजेश सिंह का आतंक इतना बड़ा था कि उस पूरे इलाके में रेलवे और दूसरे सरकारी ठेकों से लेकर कोयले तक की दलाली में बृजेश सिंह का सिक्का चलता था। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वैसे बृजेश सिंह के गायब होने की एक बड़ी वजह ये भी थी कि बृजेश पूर्वी उत्तर प्रदेश में यहां के दूसरे माफिया और विधायक मुख्तार अंसारी के हाथों बुरी तरह पिट गया था। यही वजह थी कि बृजेश ने राजनीतिक शरण के रास्ते तलाशने शुरू कर दिए थे। अपने भाई चुलबुल सिंह को बीजेपी में घुसाया। चुलबुल बनारस जिला पंचायत के अध्यक्ष बन गए। फिर भतीजा बसपा के टिकट पर पहले ब्लॉक प्रमुख और अब विधायक बन चुका है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बृजेश गिरोह के ज्यादातर बड़े अपराधियों की या तो हत्या हो चुकी है। या फिर वो चुपचाप राजनीतिकी छतरी तानकर किसी तरह अपना जीवन चला रहे हैं। बृजेश सिंह के खासमखास अवधेश राय की हत्या होने के बाद उनके छोटे भाई अजय राय विधायक हो गए और मुख्तार से लड़ाई लड़ने के बजाए सिर्फ अपनी इज्जत बचाने में ही लगे रहे। कृष्णानंद राय जैसे लोग भी थे जो, बीजेपी से विधायक चुने जाते रहे और बृजेश गिरोह की अघोषित रूप से कमान संभाले हुए थे। लेकिन, आरोप है कि मुख्तार अंसारी ने ही कृष्णानंद राय की हत्या करवा दी। मुख्तार के गृह जिले गाजीपुर में ही कृष्णानंद राय का चुनौती बने रहना मुख्तार को कैसे बर्दाश्त हो सकता था। बनारस में हुई अवधेश राय की हत्या में भी मुख्तार पर आरोप है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आमतौर पर लोगों को बृजेश और मुख्तार की दुश्मनी ही लोगों को याद है। लेकिन, दरअसल बृजेश के अपराधी बनने की शुरुआत आजमगढ़ की बाजार में बृजेश के पिता की हत्या होने से हुई थी। जब दूसरे दबंग ठाकुरों ने बृजेश के पिता को गोली मारकर और चाकुओं से छलनी कर हत्या कर दी थी। उस समय पूर्वी उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के दो बदमाशों हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र शाही की दुश्मनी खुलेआम चलती थी। हरिशंकर तिवारी ब्राह्मण और वीरेंद्र शाही ठाकुर बदमाशों के सरगना जैसे काम करते थे। उसी में बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी का उदय हुआ। &lt;br /&gt;चढ़ी रंगबाजी के समय बृजेश सिंह ने बहुत तेजी से पूरे उत्तर प्रदेश में अपना जाल फैला लिया। बिहार में तब वीरेंद्र सिंह टाटा की अच्छी गुंडागर्दी चलती थी। बृजेश सिंह और वीरेंद्र टाटा ने अच्छा कॉकस बना लिया था। जिससे चंदौसी की कोयला खदानों से लेकर बोकारो और जमशेदपुर तक इन लोगों की तूती बोलने लगी। कोयले की कमाई के अलावा रेलवे, पीडब्ल्यूडी और दूसरे सरकारी विभागों की ठेकेदारी इन लोगों की कमाई का मुख्य जरिया था। बृजेश सिंह का नाम मुंबई के जेजे अस्पताल गोलीकांड में भी आया था। लेकिन, इन सबके बावजूद बृजेश ज्यादातर अंडरग्राउंड ही रहता था। वो, लोगों के सामने नहीं आता था। उसकी यही मजबूती धीरे-धीरे कमजोरी बनती गई। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुख्तार जेल में होता या फिर बाहर जबकि, बृजेश अंडरग्राउंड रहकर ही गिरोह चला रहा था। इस बीच मुख्तार और बृजेश गिरोह के बीच कई बार आमने-सामने गोलियां चलीं। एक बार तो बृजेश सिंह ने गिरोह के साथ गाजीपुर जेल में बंद मुख्तार अंसारी पर गोलियां चलाईं। लेकिन, धीरे-धीरे मुख्तार अंसारी का पलड़ा भारी होता गया। बनारस में अवधेश राय की हत्या के बाद बृजेश सिंह इस क्षेत्र में काफी कमजोर हो गया। इसी बीच हरिशंकर तिवारी के ही तैयार किए लड़के गोरखपुर में उन्हें चुनौती देना शुरू कर चुके थे। 1995 आते-आते गोरखपुर में शिव प्रकाश शुक्ला, आनंद पांडे और राजन तिवारी का गिरोह हरिशंकर तिवारी को उन्हीं के गढ़ में चुनौती देने लगा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हरिशंकर तिवारी से सीखने वाले ये लड़के इतने मनबढ़ थे कि वो, अकेले बादशाह बनना चाहते थे। उनके निशाने हर वो बदमाश था जिसकी हत्या करने से उनका कद बढ़ जाता। पहले इन मनबढ़ लड़कों के शिकार गोरखपुर के छोटे-मोटे बदमाश हुए। फिर कई बार की कोशिश के बाद इन लोगों ने वीरेंद्र शाही की लखनऊ में हत्या कर दी। शिव प्रकाश शुक्ला हरिशंकर तिवारी को मारकर उन्हीं की विधानसभा चिल्लूपार से चुनाव लड़ने की तैयारी में था। लेकिन, आनंद पांडे की वजह से शिव प्रकाश की य हसरत परवान नहीं चढ़ की।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लेकिन, इन लड़कों के मुंह खून लग चुका था। हर एक हत्या के बाद इनके पास पैसा और बदमाशों वाली इज्जत बढ़ती जा रही थी। बिहार के मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हॉस्पिटल में हत्या, इलाहाबाद में जवाहर पंडित की दिनदहाड़े व्यस्त बाजार सिविल लाइंस में हत्या, बनारस से मिर्जापुर के रास्ते में वीरेंद्र टाटा की हत्या, लखनऊ में गोरखपुरे के एक नेता पर होटल में घुसकर चलाई गई गोलिया और दूसरी कई हत्याएं एक के बाद एक हुईं और सबमें शिव प्रकाश शुक्ला, आनंद पांडे और राजन तिवारी गिरोह का ही नाम आया। कहा जाता है कि इन लोगों ने लखनऊ में मुख्तार अंसारी के काफिले का भी पीछा किया था लेकिन, मुख्तार भाग निकलने में सफल रहा। कहा ये भी जाता है कि प्रतापगढ़ के बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह से ये वसूली करने में कामयाब भी हो गए थे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इनका दिमाग खराब हुआ तो प्रदेश के सारे माफिया इन नए लड़कों के गिरोह के दुश्मन बन गए। और, पुलिस को इनके छिपने के ठिकाने के बारे में जानकारी देनी शुरू कर दी। इसी बीच ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या में साक्षी महाराज और विजय सिंह का नाम आया तो, इस गिरोह ने साक्षी महाराज को निशाना बनाने की कोशिश की। लेकिन, इससे पहले कि वो सफल होते, साक्षी महाराज ने अपनी और तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की जान को शिव प्रकाश शुक्ला से खतरा बताकर पुलिस मशीनरी की इज्जत दांव पर लगा दी। फिर क्या था पहले एक-एक कर इस गिरोह के शूटर लड़के मारे गए। फिर आनंद पांडे और फिर शिव प्रकाश शुक्ला को पुलिस ने मार गिराया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री रहते बड़े पैमाने पर बदमाशों के पुलिस एनकाउंटर के बाद कई सालों तक उत्तर प्रदेश में संगठित अपराधी छिपते-छिपाते ही अपराध कर रहे थे। लेकिन, फिर धीरे-धीरे पूर्वी उत्तर प्रदेश में दूसरे बदमाशों का गिरोह तैयार हो गया। गाजीपुर में मुख्तार अंसारी, इलाहाबाद में  अतीक अहमद और प्रतापगढ़ में रघुराज प्रताप सिंह अपनी जड़ें मजबूत कर चुके थे। मुलायम सिंह यादव के शासन में इन तीनों की ही तूती बोलती थी। फिर भी ये अपने क्षेत्रों से बाहर बहुत दखल नहीं देते थे। इस वजह से उत्तर प्रदेश में आम लोग दहशत में नहीं थे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब बृजेश सिंह पकड़ा जा चुका है। बृजेश के पहले ही राजनीतिक आत्मसमर्पण की बातें हो रही थीं। और, कहा भी जा रहा है कि बीजेपी और बीएसपी के जरिए वो खुद को बचाए रखने में कामयाब हो पा रहा था। लेकिन, अब बृजेश सबके सामने होगा। कानून की पेचीदगियों के लिहाज से बृजेश को जमानत भी मिल सकती है। या फिर वो लंबे समय लिए जेल में होगा। साफ है जिस बृजेश का किसी ने जब चेहरा नहीं देखा था और उसकी आतंक से कमाई चल रही थी तो, उसके सामने आने के बाद की स्थिति का अंदाजा साफ लगाया जा सकता है। बृजेश बहुत कमजोर हो चुका है और सपा की सरकार न होने से मुख्तार अंसारी को भी प्रशासन से बहुत मदद नहीं मिलने वाली है। लेकिन, दोनों के बीच एक बार फिर से पूर्वी उत्तर प्रदेश के अंडरग्राउंड साम्राज्य पर कब्जे की लड़ाई शुरू हो सकती है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-9040716486004122994?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/9040716486004122994/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=9040716486004122994' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/9040716486004122994'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/9040716486004122994'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2008/01/blog-post_24.html' title='उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा इनामी पकड़ में आने का मतलब'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' 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src="http://3.bp.blogspot.com/_JjdjlOPhD0w/R6fXML-1f6I/AAAAAAAAACA/ppoMhtIaAdY/s320/chandra.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5163332102178308002" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;स्वर्गीय चंद्रशेखर में बलिया के बागियों की निष्ठा अब भी बनी हुई है। आजीवन बलिया से सांसद रहे चंद्रशेखर की मृत्यु के बाद बलिया की जनता ने उनके बेटे को सांसद बना दिया। अब उत्तर प्रदेश की एक लोकसभा सीट के उपचुनाव के नतीजे आए तो, राजनीतिक विश्लेषक और पार्टियों इस जीत के राजनीतिक मायने निकालने में जुट गए हैं। लेकिन, अगर ईमानदारी से इस चुनाव के नतीजे को देखें तो, इसके मायने देश की राजनीति के युवा तर्क को बलिया की जनती अंतिम श्रद्धांजलि से ज्यादा ये कुछ नहीं है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मेरे ऐसा कहने की पीछे खास वजह भी है। चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर समाजवादी पार्टी के टिकट से सांसद चुने गए हैं, इसलिए स्वाभाविक है कि सपा इसका जोर-शोर से हल्ला करेगी और इसे राज्य में आने वाले लोकसभा चुनाव के राजनीतिक रुझान के तौर पर बताएगी। उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार आने के बाद से मांद में छिप गए सपा के कार्यकर्ता-नेता बलिया जीतने के बाद चौराहों, बैठकों पर फिर से लोहिया के आधुनिक चेले मुलायम को धरती पुत्र बताने लगे हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लेकिन, क्या बलिया सपा ने जीता है। एकदम नहीं। बलिया की लोकसभा सीट बलिया वालों ने चंद्रशेखर को पैतृक संपत्ति जैसा बनाकर दे दिया था। अब पैतृक संपत्ति थी तो, स्वाभाविक है कि बेटे को इसे विरासत में मिलना ही था। समाजवादी पार्टी ने तो, बस मौके की नजाकत भांपकर नीरज शेखर को साइकिल पर बिठा दिया। बलिया को स्वर्गीय चंद्रशेखर की पैतृक संपत्ति मैं इसलिए कह रहा हूं कि बलिया जाने पर कहीं से भी ये अहसास नहीं होता कि ये भारतीय राजनीति के एक सबसे ताकतवर नेता की आजीवन लोकसभा सीट रही है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;विकास बलिया में रहने वालों को टीवी चैनल या फिर अखबारों की खबरों के जरिए ही पता है। या फिर जो, दिल्ली में चंद्रशेखर के बंगले जाते थे उन्होंने, ही देखा-जाना है। लेकिन, फिर भी चंद्रशेखर जिंदा रहते (और शायद अब भी) बलिया में चंद्रशेखर फोबिया ऐसा था कि बलिया से विधानसभा चुनाव जीतने वाले भाजपा के कई विधायक, मंत्री भी लोकसभा चुनाव में चंद्रशेखर के पक्ष में ही चीखते नजर आते थे। &lt;br /&gt;यहां रहने वालों को चंद्रशेखर ने विकास के नशे से इतना दूर रखा कि लोग उन्हें सिर्फ चंद्रशेखर होने के नाम से ही सारी जिंदगी जिताते रहे। बलिया में विकास न करने के लिए चंद्रशेखर से बड़ा कुतर्क शायद ही कोई दे सके। चार महीने के लिए इस देश के प्रधानमंत्री रहे चंद्रशेखर कहते थे- मैं देश का नेता हूं। मुझे देश की तरक्की करनी है, देश तरक्की करेगा तो, बलिया भी विकसित हो जाएगा। चंद्रशेखर अब हमारे बीच नहीं रहे। लेकिन, चंद्रशेखर की इस बात पर बहस होनी इसलिए जरूरी है कि कोई नेता जिस लोकसभा सीट से चुनकर संसद मे पहुंचता हो, वहां के विकास पर ऐसे अजीब कुतर्क कैसे गढ़ सकता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लेकिन, बलिया के लोग शायद ऐसे ही हैं। बस चंद्रशेखर ने उनकी नब्ज पकड़कर उसी हिसाब से उन्हें उन्हीं की अच्छी लगने वाली भाषा में उसी बात को उनके दिमाग में बसा दिया कि वो देश में सबसे अलग और कुछ श्रेष्ठ हैं। बलिया के लोगों को मैं अपनी पढ़ाई के दौरान इलाहाबाद में बड़े ठसके से ये नारा लगाते सुनता था कि ‘अदर जिला इज जिल्ली, बलिया इज नेशन’। बागी बलिया कहकर वो खुश हो लेते हैं। देश से दस दिन पहले बलिया आजाद हुआ था, बस इतने से ही खुश हो लेते हैं। इस आत्ममुग्धता के शिकार बलिया वालों को पता ही नहीं लगा कि कब वो देश की मुख्य धारा से पूरी तरह से अलग हो गए हैं। यहां तक कि बलिया वालों को बगल के मऊ को देखकर भी शर्म नहीं आती लिया जो, कल्पनाथ राय के सांसद रहते हुए तहसील से चमकता हुआ जिला बन गया था।   &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;खैर, चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर बलिया से जीतकर लोकसभा में यानी दिल्ली पहुंच गए हैं। वैसे बलिया के लोगों को पता नहीं कैसे ये भ्रम हो रहा है कि चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर को उन्होंने बलिया से दिल्ली पहुंचा दिया। चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर तो पहले से ही दिल्ली में थे। और, ऐसे दिल्ली में थे कि इस लोकसभा चुनाव से पहले मुश्किल से ही बलिया के लोग चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर को पहचानते थे। यही वजह थी कि मायावती की बहुजन समाज पार्टी बलिया में चंद्रशेखर के ही बेटे को बाहरी बताने का दुस्साहस कर रही थी। लेकिन, ब्राह्मण स्वाभिमान के तथाकथित, स्वयंभू प्रतीक हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी पर दांव लगाना बसपा के काम नहीं आया। चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर को 2,95,000 वोट मिले जबकि, हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर को 1,64,000 यानी लड़ाई में बहुत फासला था। कुल मिलाकर चंद्रशेखर का बेटा चंद्रेशखर से भी ज्यादा वोटों से जीतकर संसद पहुंच गया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कांग्रेस की तो वैसे भी उत्तर प्रदेश में कोई गिनती है नहीं तो, फिर बलिया में अचानक होने की कोई वजह भी नहीं थी। लेकिन, यहां बीजेपी की जो दुर्गति हुई वो, देखने लायक है। भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता और एक जमाने में चंद्रशेखर के ही प्रिय शिष्यों में गिने जाने वाले वीरेंद्र सिंह को सिर्फ 22,000 वोट मिले। यानी साफ है कि फिलहाल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों के समय वाले ही हालात हैं। सीधी लड़ाई बसपा और सपा के बीच ही है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यही समीकरण 2009 के लोकसभा चुनाव तक भी बना हुआ दिख रहा है। और, अगर यही रहा तो, 2009 में भाजपा की ओर से ‘Ex PM in Waiting’ लाल कृष्ण आडवाणी 2009 लोकसभा चुनाव के बाद ‘Ex PM in Waiting’  हो जाएंगे। बलिया लोकसभा उपचुनाव के नतीजे का संदेश मुझे तो साफ दिख रहा है। आप लोगों की क्या राय है बताइए।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-4877322382213442728?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/4877322382213442728/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=4877322382213442728' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/4877322382213442728'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/4877322382213442728'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2008/01/blog-post_06.html' title='चंद्रशेखर की पैतृक संपत्ति बलिया के लोगों ने उनके बेटे को सौंप दी'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_JjdjlOPhD0w/R6fXML-1f6I/AAAAAAAAACA/ppoMhtIaAdY/s72-c/chandra.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-309684217610552286</id><published>2008-01-05T21:11:00.001+05:30</published><updated>2008-02-05T09:05:43.209+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='राजनीति'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='इलाहाबाद कॉफी हाउस'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='साहित्य'/><title type='text'>50 साल का हो गया इलाहाबाद का कॉफी हाउस</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_JjdjlOPhD0w/R6fZhr-1f-I/AAAAAAAAACg/MbxxRlz_MNM/s1600-h/coff.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://1.bp.blogspot.com/_JjdjlOPhD0w/R6fZhr-1f-I/AAAAAAAAACg/MbxxRlz_MNM/s320/coff.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5163334670568751074" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;इलाहाबाद का कॉफी हाउस। शहर के सबसे पॉश इलाके सिविल लाइंस में रेलवे के नजदीक बसा ये कॉफी हाउस इलाहाबाद की खास संस्कृति का वाहक, पहचान रहा है। ये खास पहचान थी, इलाहाबाद की कला साहित्य, संस्कृति, आंदोलन और राजनीति में खास भूमिका की। वो, भूमिका जो, याद दिलाती है कला, साहित्य के क्षेत्र में इलाहाबाद की अगुवाई की। माना ही ये जाता है कि कोई इस शहर से गुजर भी गया तो, साहित्य, संस्कृति और राजनीति के दांव-पेंच से अछूता, अपरिचित तो रह ही नहीं सकता। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक जमाने में मशहूर प्रकाशन लोकभारती, नीलाभ, हंस, शारदा, अनादि, परिमल इलाहाबाद शहर में थे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से निकली साहित्यकारों से निकली टोली का जमावड़ा यहां होता था। अस्सी के दशक तक इलाहाबाद का कॉफी हाउस देश की राजनीति और साहित्य में सबसे ज्यादा प्रासंगिक था। यहां के सफेद फीते वाली ड्रेस में सजे सिर पर लाल फीत वाली लटकती टोपी को सिर पर सजाए बेयरे पूरी अंग्रेजी नफासत के साथ लोगों को कॉफी सर्व करते थे। और, बेहद पुरानी स्टाइल की चौकोर मेज के चारों तरफ राजनीति और साहित्य के साथ देश की दशा-दिशा पर जोरदार बहस यहां किसी भी समय सुनने को मिल जाती थी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राममनोहर लोहिया जैसे समाजवादी नेता और हेमवती नंदन बहुगुणा यहां राजनीतिक गुणा-गणित का हिसाब लगा रहे होते थे तो, इसी कॉफी हाउस में फिराक गोरखपुरी, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा जैसे देश के दिग्गज साहित्यकारों का दरबार लगा रहता था। और, इनकी बहसों से निकलने वाली बातें इलाहाबाद के आम लोगों की चर्चा मे अनायास ही शामिल हो जाती थीं। उपेंद्रनाथ अश्क, धर्मवीर भारती, लक्ष्मीकांत वर्मा जैसे लोगों की चर्चा में लोगों की इनकी अगली कहानी के प्लॉट मिलते थे। कमलेश्वर जब भी इलाहाबाद में होते थे, कॉफी हाउस जरूर जाते थे। दूधनाथ सिंह तो, अब भी इलाहाबाद में कॉफी हाउस में कभी-गोल जमाए मिल सकते हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लेकिन, आज 50 साल बाद शहर की इस खास पहचान के बारे में शहर के लोगों को भी बहुत कुछ खास पता नहीं रह गया है। यहां तक कि हाल ये है कि कला, साहित्य, संस्कृति, आंदोलन और राजनीति की दशा-दिशा तय करने वाला कॉफी हाउस में अब चंद ही ऐसी रुचि के लोग मिलते हैं। अब ज्यादातर समय इस कॉफी हाउस में इलाहाबाद हाईकोर्ट के कुछ वकील, कुछ पुराने नेता, कुछ ऐसे बुजुर्ग जो, पुराने दिन याद करने चले आते हैं या फिर कुछ ऐसे लोग जो, कॉफी हाउस में बैठने की बस परंपरा निभाने के लिए ही बने हैं यानी एकदम खाली हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कमाल तो है कि इलाहाबाद के इंडियन कॉफी हाउस के सामने सड़क पर अंबर कैफे खुला। ये कैफे खुला तो था सड़क पर अपना धंधा जमाने के लिए। लेकिन, कॉफी हाउस के सामने सड़क पर इसका खुलना ऐसा हो गया है कि नए जमाने के लड़के-लड़कयों को तो शायद ही अब असली कॉफी हाउस का पता होगा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुराने-नए नेताओं का जमावड़ा भी इसी अंबर कैफे पर ही होता है। लेकिन, कॉफी हाउस की पुरानी पहचान आज भी शहर के लोगों को रोमांचित करती है। इलाहाबाद के कॉफी हाउस से जुड़ी बहुत कम बातों की जानकारी के लिए मुझे माफ करिएगा। और, अगर इलाहाबाद में पुराने दौर से जुड़ा आपमें से कोई इस कॉफी हाउस से जुड़े कुछ और रोचक या जानकारी बढ़ाने वाली बात जोड़ सके तो, स्वागत है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-309684217610552286?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/309684217610552286/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=309684217610552286' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/309684217610552286'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/309684217610552286'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2008/01/50.html' title='50 साल का हो गया इलाहाबाद का कॉफी हाउस'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_JjdjlOPhD0w/R6fZhr-1f-I/AAAAAAAAACg/MbxxRlz_MNM/s72-c/coff.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-8953329477202955001</id><published>2008-01-05T06:45:00.001+05:30</published><updated>2008-01-05T06:46:13.284+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मायावती'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='संसद'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='उत्तर प्रदेश'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अपराध'/><title type='text'>अब भी समझ जाओ भइया नहीं तो बड़ी मुश्किल होगी</title><content type='html'>देश के इतिहास में ये पहली बार हुआ है कि किसी सांसद के खिलाफ पुलिस ने अपराधियों की तरह स्केच जारीकर उसे भगोड़ा घोषित कर दिया। माननीय (मुझे ये लिखते हुए शर्म आ रही है) सांसदों की सुरक्षा के लिए लगी रहने वाली पुलिस एक सांसद की तलाश में पिछले कई महीनों से घूम रही है। सफलता नहीं मिली तो, सांसद के चेहरे के सात संभव तरीके वाले स्केच जारी किए। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ये सांसद हैं इलाहाबाद की फूलपुर संसदीय सीट से सांसद अतीक अहमद। अतीक अहमद पर वैसे तो इतने अपराधिक मामले और आरोप दर्ज हैं कि उनकी बिना पर ही सांसद को दो-तीन जन्म तो जेल में काटने ही पड़ सकते हैं। लेकिन, एक अपराधी से लगातार चार बार विधायक और फिर उसी जिले की एक सीट से अतीक को संसद का भी सफर करने का रास्ता मिल गया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अतीक उस फूलपुर सीट से सांसद हैं जहां से देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु सांसद थे। और, जिस सीट से दलित चेतना के प्रणेता कांशीराम को चुनाव हारना पड़ा था। अतीक पर आरोप सामान्य नहीं है। सांसद अतीक और उनके विधायक भाई अशरफ पर बसपा से विधायक चुने गए राजू पाल की हत्या का आरोप है। इलाहाबाद की शहर पश्चिमी सीट से लगातार चार बार विधायक अतीक ने जब अपनी विधानसभा सीट अपनी पैतृक संपत्ति समझकर आपने छोटे भाई अशरफ को सौंपी तो, समाजवादी पार्टी ने जिताऊ गणित के तहत अशरफ को टिकट भी दे दिया। क्योंकि, 2004 में अतीक को फूलपुर से लोकसभा से चुनाव लड़ना था। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लेकिन, बरसों से अतीक के आतंकराज से डरी-सहमी-ऊबी जनता ने नवंबर 2004 में हुए विधानसभा चुनाव में बसपा के राजू पाल को जिता दिया। राजू पाल भी अपराधी था लेकिन, जनता को लगा कि अतीक से तो बेहतर ही होगा। लेकिन, जनता को क्या पता था कि पैतृक विरासत छिनने पर कोई अपराधी क्या-क्या कर सकता है। आरोप है कि अतीक अहमद और अतीक के छोटे भाई अशरफ ने मिलकर राजू पाल की हत्या की साजिश रची और हत्या करवा दी। सपा के शासन में ये सब हुआ था तो, पार्टी के ही बाहुबली सांसद और उसके छोटे भाई के खिलाफ कोई कार्रवाई कैसे हो सकती थी। कुछ हुआ भी नहीं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;25 जनवरी 2005 को राजू पाल की हत्या हुई थी उसके बाद हुए दूसरे उपचुनाव में अतीक का छोटा भाई अशरफ जीतकर विधानसभा पहुंच गया। लेकिन, जब 2007में राज्य में विधानसभा के चुनाव हुए तो, अतीक, अशरफ के साथ पूरे राज्य सपा के पापों का घड़ा भर चुका था और पश्चिमी विधानसभा से अपराधी अशरफ और राज्य से अपराधियों की सरकार कही जाने वाली सपा सरकार गायब हो गगई और राजू पाल की पत्नी पूजा पाल विधायक हो गई।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उत्तर प्रदेश में ही एक और फैसला आया है। उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने फैसला किया है कि उत्तर प्रदेश में पक्षी विहार प्रतापगढ़ की कुंडा तहसील में बेंती में ही बनेगा। बेंती अब भी रजवाड़ा है और बाहुबली उदय सिंह और सामान्य अपराधी से नेता, विधायक और मंत्री तक बन चुके उनके बेटे रघुराज प्रताप सिंह के आतंक से त्रस्त है। मायावती के शासन में बेंती में रजवाड़े के अवैध कब्जे वाली झील को पक्षी विहार बनाया गया और सरकार ने लाखों रुपए खर्च करके वहां पर पक्षी विहार बनाया। बसपा की सरकार गई और सपा की सरकार आ गई। बस इतने से ही सारा मामला बदल गया अपराधी कहे जा रहे रघुराज प्रताप सिंह सपा की सरकार में मंत्री बन गए। अब सरकारी पैसे से बना पक्षी विहार राजा रघुराज प्रताप सिंह की निजी संपत्ति बन गया । लेकिन, अच्छा हुआ कि मायावती ने फिर से सरकारी पैसे का दुरुपयोग और एक बाहुबली के आतंक को थोड़ा कम करने की कोशिश की। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उत्तर प्रदेश सरकार का इलाहाबाद के एक अपराधी सांसद और उसके छोटे अपराधी भाई और उससे सटे प्रतापगढ़ जिले के एक रजवाड़े (अब विधायक) के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान निश्चित तौर पर काबिले तारीफ है। ये गलत कामों के खिलाफ चल रहा अभियान है। लेकिन, सच्चाई यही है कि ये अभियान इसीलिए चल रहा है क्योंकि, इन दोनों ने समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान मायावती से निजी पंगा ले लिया था। और, एक मुख्यमंत्री की निजी रुचि लेने की वजह से ही ये सब हो पा रहा है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सवाल ये है कि क्या एक सरकार बदलने की वजह से ही सिर्फ अपराधी है या नहीं ये तय होता है। &lt;a href="http://batangad.blogspot.com/2007/11/blog-post_2535.html"&gt;मायावती की ही सरकार में उनके कई मंत्री, विधायक, नेता अपराध कर रहे हैं और पुलिस उन्हें सलामी बजा रही है। &lt;/a&gt;अतीक अहमद और अशरफ को भी पुलिस की सुरक्षा मिली हुई थी। क्या वो पुलिस भी उन्हें बचाने में लगी रही जो, अब तक उन दोनों अपराधियों को पुलिस पकड़ नहीं सकी। सांसद अतीक के खिलाफ यूपी पुलिस ने संसद से अपील की है कि वो, अपराधी अतीक को शरण न दे। लेकिन, देश में उत्कृष्ट मापदंड की बात करने वाले सभी पार्टियों के नेता क्या अतीक जैसे अपराधी को संसद में अब तक शरण नहीं दे रहे थे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;फिर सब कुछ जानते-बूझते इस तरह के सवाल पहेली क्यों बने हुए हैं। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ता है। लेकिन, शायद जनता खुद ही इसकी जिम्मेदार है क्योंकि, हो सकता है अगले लोकसभा चुनाव में अतीक को वो फिर से सांसद और उसके छोटे भाई अशरफ को विधायक बना दे। साफ है सरकार बदली या फिर केंद्र में कहीं सपा के समर्थन से कोई लंगड़ी सरकार बनने की नौबत आई तो, अतीक जैसे लोग दिल्ली में शाही मेहमाननवाजी का भी मजा पा सकते हैं। लोकतंत्र की कुछ बड़ी खामियों में से ये सबसे बड़ी है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-8953329477202955001?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/8953329477202955001/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=8953329477202955001' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/8953329477202955001'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/8953329477202955001'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2008/01/blog-post.html' title='अब भी समझ जाओ भइया नहीं तो बड़ी मुश्किल होगी'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-7653721929442142631</id><published>2007-11-27T21:59:00.001+05:30</published><updated>2007-11-28T08:25:04.664+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='गुंडागर्दी'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मायावती'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मायाराज'/><title type='text'>उत्तर प्रदेश में मायावती की बसपा के विधायक, नेता सिर्फ गुंडागर्दी कर रहे हैं</title><content type='html'>उत्तर प्रदेश में मायाराज के दरबारी सत्ता के मद में पगला गए हैं। 5 साल के लिए मायावती को प्रदेश की जनता ने सत्ता दी थी कि वो स्थिरता के साथ प्रदेश को उसकी खोई प्रतिष्ठा वापस लौटाए। मायावती ने सत्ता में आने के बाद प्रदेश से गुंडाराज, जंगलराज खत्म करने का भरोसा दिलाया। लेकिन, अब हाल ये है कि मायाराज में सत्ता में शामिल लोगों के अलावा किसी की भी इज्जत सुरक्षित नहीं है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://updiary.blogspot.com/2007/11/blog-post_19.html"&gt;मायावती की बसपा के 3 नेताओं के काले कारनामे की &lt;/a&gt;वजह से प्रदेश के लोगों का डर अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि एक और विधायक ने बसपा के जंगलराज को और पुख्ता कर दिया। इस बार मामला और संगीन है। वाकया बनारस का है। एक महिला का पति दूसरी शादी कर रहा था। उसे रोकने के लिए महिला कुछ पत्रकारों को साथ लेकर शादी में पहुंच गई। लेकिन, महिला को अंदाजा नहीं था कि मायाराज में लोकतंत्र खत्म हो चुका है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;महिला के पति की दूसरी शादी में बसपा के विधायक शेर बहादुर सिंह भी मौजूद थे। पहले महिला को स्टेज से धक्का दिया गया। और, जब पता चला कि महिला पत्रकारों को लेकर आई है, शेर बहादुर सिंह के अहम को चोट लग गई। विधायक और उनके आदमियों ने पत्रकारों को पकड़कर पीटना शुरू किया। कैमरामैन, रिपोर्टर सबको 5-6 आदमी एक साथ मिलकर पीट रहे थे। राइफल, पिस्तौल के बट से पत्रकारों को पीटा गया पत्रकारों के शरीर पर खून के जमे हुए निशान बता रहे हैं कि उनकी किस बेरहमी से पिटाई की गई है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लेकिन, मायाराज में बसपा विधायक की गुंडागर्दी इतने पर ही खत्म नहीं हुई। विधायिका बेलगाम थी तो, फिर सत्ता चलाने वालों के लिए ही कानून की रखवाली करने वाले पुलिस वाले कैसे पीछे रहते। थाने में विधायक के खिलाफ रिपोर्ट लिखाने पहुंचे पत्रकारों को फिर से पुलिस ने दौड़ाकर पीटना शुरू कर दिया। लेकिन, मायावती के अपने गुंडाराज, जंगलराज में आतंक के काले कारनामे अभी और बाकी थे। चोट खाए, गुस्साए पत्रकारों ने मायावती का पुतला फूंकने की कोशिश की। तो, मायावती की निजी पुलिस की तरह काम कर रही उत्तर प्रदेश पुलिस आपे से बाहर हो गई। फिर से पत्रकारों को पीटा गया।  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यहां सवाल सिर्फ पत्रकारों के पिटने का नहीं है। सवाल ये है कि क्या बसपा के राज में बसपा के नेताओं विधायकों और पुलिस वालों को कानून को ठेंगे रखने का हक मिल गया है। कानूनन कोई भी व्यक्ति एक महिला से शादी करने के बाद दूसरी महिला से शादी नहीं कर सकता जब तक कि उसको तलाक न मिल जाए। लेकिन, बसपा विधायक के प्रिय व्यक्ति पहली बीवी से बिना तलाक के ही दूसरी शादी कर रहे थे। इस तरह से विधायक शेर बहादुर सिंह भी कानून तोड़ने को दोषी हुए। उसके बाद तो विधायक ने कानून की ऐसी धज्जियां उड़ाईं जो, उत्तर प्रदेश के इतिहास में काले कारनामे में दर्ज हो गया है। लेकिन, पता नहीं अब इन घटनाओं को काला कारनामा माना भी जाता है या नहीं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसके बाद सरकारी खानापूरी करने के लिए विधायक शेर बहादुर सिंह, सीओ संसार सिंह और इंस्पेक्टर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। लेकिन, साथ ही पत्रकारों के खिलाफ भी कई मामले दर्ज कर दिए गए। अब जब पत्रकारों के खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया गया है तो, साफ है विधायक और दूसरे आरोपियों पर कोई कार्रवाई क्यों की जाएगी। 3 साल के शासन के बाद मुलायम राज में रहना दूभर हुआ था। अब बसपा का हाथी तो पूरे उत्तर प्रदेश को ही जंगल बनाकर उसे बरबाद करने पर जुटा गया है। उत्तर प्रदेश का अब राम भला करें।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-7653721929442142631?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/7653721929442142631/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=7653721929442142631' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/7653721929442142631'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/7653721929442142631'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2007/11/blog-post_27.html' title='उत्तर प्रदेश में मायावती की बसपा के विधायक, नेता सिर्फ गुंडागर्दी कर रहे हैं'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-8167682854950097103</id><published>2007-11-20T11:13:00.000+05:30</published><updated>2007-11-28T08:24:51.503+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='गुंडागर्दी'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मायाराज'/><title type='text'>उत्तर प्रदेश में दलित महिलाओं की इज्जत खतरे में है</title><content type='html'>दलित स्वाभिमान, दलित चेतना, बहुजन हित, जिसकी जितनी भागीदारी, उसके उतनी हिस्सेदारी—ये सारे नारे उत्तर प्रदेश में बेइज्जत हो रहे हैं। बहनजी की सरकार है। वही बहनजी कांशीराम के कंधे पर सवार होकर कर्कश आवाज में तिलक, तराजू और तलवार उनको मारो जूते चार जैसे नारे लगाकर और फिर ऊंची जातियों को सर-आंखों पर बिठाकर उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनने वाली। देश की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री मायावती के राज में कितनी दलित महिलाओं की इज्जत लूटी जा रही है इसकी संख्या तो बताना संभव नहीं है लेकिन, कुछ घटनाएं साफ कर देती हैं कि इस राज्य में महिलाओं, खासकर &lt;a href="http://updiary.blogspot.com/2007/11/blog-post_08.html"&gt;दलित महिलाओं की इज्जत बचनी मुश्किल हो रही है।&lt;/a&gt; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आनंदसेन यादव- फैजाबाद से विधायक (पूर्व मंत्री), लोकेंद्र शर्मा- बदायूं से विधायक, सुनील बाबू- कानपुर के बसपा नेता। इन तीनों में कई समानताएं हैं। इन तीनों पर बहनजी का वरदहस्त है। ये तीनों दबंग हैं। ये तीनों दलित महिलाओं से बलात्कार के मामले में आरोपी हैं। और, ये तीनों खुलेआम सीना तानकर घूम रहे हैं लेकिन, इनका कोई कुछ बिगाड़ने की हैसियत में नहीं है, कम से कम उत्तर प्रदेश में तो बिल्कुल ही नहीं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मायावती सरकार में मंत्री आनंदसेन यादव को एक बसपा कार्यकर्ता की बेटी के अपहरण और उसकी हत्या के आरोप लगने के बाद इस्तीफा देना पड़ा। आनंदसेन यादव से मंत्री पद तो चला गया लेकिन, अब तक उनके खिलाफ कोई मामला नहीं दर्ज हो सका है। जबकि, इस बात के पक्के सुबूत हैं कि आनंदसेन और बसपा कार्यकर्ता की बेटी के बीच कैसे संबंध थे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अभी शशि के घरवाले शशि का पता तक नहीं लगा पाए थे कि एक और दलित महिला की इज्जत खुलेआम लूटे जाने की खबर आ गई। बदायूं के बसपा विधायक लोकेंद्र शर्मा ने एक दलित महिला की इज्जत लूटी। करीब महीने भर तक उसे अपने साथ रखा। और, जब मन भर गया तो, उसकी शादी सक दोगुनी उम्र के आदमी से करा दी। वो किसी तरह बचकर भागी गुहार लगाई लेकिन, दलितों की गुहार सत्ता के ऊंचे सिंहासन पर बैठी बहनजी के कानों तक पहुंच ही नहीं पा रही है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;और, आज तो हद हो गई। कानपुर में उत्तर प्रदेश की पुलिस समीक्षा बैठक में एक ऐसा अपराधी सीना ताने प्रदेश के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक के सामने घूम रहा था जिसके ऊपर एक दर्जन से ज्यादा अपराधिक मामले हैं। उसमें भी एक ताजा मामला एक दलित महिला से बलात्कार का है। सुनील बाबू नाम के इस बसपा नेता की दबंगई का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वो पुलिस समीक्षा बैठक में प्रदेश के आला पुलिस अफसरों के साथ था। सुनील बाबू इतने से ही नहीं माना। बलात्कार के मामले में उसके खिलाफ गवाही देने वाली महिला के पति को दिन दहाड़े घर से सुनील बाबू और उसके गंडों ने उठा लिया। अब तक उसका कोई पता नहीं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ये कुछ घटनाएं हैं जो, मीडिया में ब्रेकिंग न्यूज की जल्दबाजी की वजह से सामने आ गई। ऐसे जाने कितने मामले होंगे जो, सामने आ ही नहीं पा रहे हैं। लेकिन, उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती को तो प्रदेश में अपराध, भ्रष्टाचार, जंगलराज समाजवादी पार्टी की सरकार जाने के साथ ही खत्म हो गया दिखता है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-8167682854950097103?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/8167682854950097103/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=8167682854950097103' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/8167682854950097103'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/8167682854950097103'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2007/11/blog-post_19.html' title='उत्तर प्रदेश में दलित महिलाओं की इज्जत खतरे में है'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-3296859352414346854</id><published>2007-11-14T19:27:00.000+05:30</published><updated>2007-11-28T08:24:05.458+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='राहुल गांधी'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='कांग्रेस'/><title type='text'>राहुल गांधी को पता चल गया होगा कि उत्तर प्रदेश में असली मुश्किल क्या है</title><content type='html'>उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी फिर कुछ खास नहीं कर पाई। फिर कुछ कास इसलिए कहना पड़ता है कि पिछले 18 साल से राज्य में पार्टी का हाल कुछ ऐसा ही है। लेकिन, उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की तरफ से खास ये हुआ कि सोनिया गांधी ने राहुल गांधी को उत्तर प्रदेश में कमान सौंपने के साफ संकेत दे दिए। राहुल ने जमकर मेहनत भी की। लेकिन, कोई जमीनी आधार न बचा होने से इसका परिणाम कुछ नहीं निकला। &lt;br /&gt;अब लोकसभा चुनाव के पहले सोनिया ने एक बार फिर से &lt;a href="http://batangad.blogspot.com/2007/09/blog-post_6851.html"&gt;राहुल गांधी को और मजबूत &lt;/a&gt;करके उत्तर प्रदेश से ज्यादा से ज्यादा कांग्रेसी संसद में भेजने का जिम्मा सौंप दिया है। राहुल गांधी को ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के महासचिव के साथ ही छात्र और युवा संगठन का जिम्मा दिया गया है। राहुल के साथ के लिए कई नौजवानों को उनके साथ लगाया गया है। लेकिन, उत्तर प्रदेश में असली मुश्किल क्या है ये राहुल गांधी को कांग्रेस महासचिव बनने के बाद अपनी पहली सांगठनिक यात्रा में ही पता चल गया।&lt;br /&gt;सोमवार को राहुल गांधी लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे। दिल्ली से उनके साथ उत्तर प्रदेश के नए-नवेले प्रभारी दिग्विजय सिंह थे। तो, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नई-नवेली अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी लखनऊ में पूरे जोश के साथ उनके स्वागत के लिए थीं। प्रेस कांफ्रेंस शुरू होते ही पत्रकारों ने सवालों की बौछार शुरू की तो, कभी माइक बॉक्स प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी अपनी तरफ खींचकर जवाब देने लगतीं तो, कभी प्रदेश प्रभारी राहुल बाबा को बचाने में अपने वाक कौशल का इस्तेमाल करने लगते। &lt;br /&gt;इसी बीच किसी पत्रकार ने कह दिया कि राहुल गांधी को बोलना नहीं आता क्या। सवाल तो, उन्हीं से किए जा रहे हैं। खिसियाए राहुल ने माइक लेकर कहा कि आप लोगों को क्या लगता है कि मुझे बोलना नहीं आता। अब मैं आप लोगों को बोलकर दिखाता हूं। वैसे तो, रीता जोशी और दिग्विजय सिंह दोनों ही राहुल बाबा के सुरक्षा कवच बनने की कोशिश भर कर रहे थे। लेकिन, कांग्रेस की असली बीमारी यही है। यहां बोलने वाले नेता बहुत ढेर सारे हैं। इतने कि मंच टूट जाते हैं लेकिन, मंच के नीचे नेताओं को सुनने के लिए कार्यकर्ता नहीं मिलते। &lt;br /&gt;कांग्रेस की उत्तर प्रदेश में एक और बड़ी बीमारी है। इस राज्य में कांग्रेस के बहुत बड़े-बडे नेता हैं। हर शहर में ये नेता दूसरी किसी भी पार्टी के नेता से मजबूत हैं। इनके पास कार्यकर्ता भी हैं। लेकिन, वो कार्यकर्ता कांग्रेस के लिए सिर्फ अपने नेताजी को मजबूत करने के लिए काम करता है। अपने नेता को मजबूत करने के इसी चक्कर में अक्सर एक बडे कांग्रेसी नेताजी के कार्यकर्ता दूसरे बड़े कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के साथ भिड़ जाते हैं। ऐसा भिड़ते हैं कि कांग्रेस कमजोरी हो जाती है।&lt;br /&gt;नई-नवेली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी के अपने शहर इलाहाबाद में तो ये आम बात है। विधानमंडल दल के नेता प्रमोद तिवारी, पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक बाजपेयी और रीता जोशी के समर्थकों के बीच अकसर किसी राष्ट्रीय नेता के सामने अपनी हैसियत दिखाने के लिए मारपीट हो जाती थी। अच्छा हुआ कि रीता के चिर प्रतिद्वंदी अशोक बाजपेयी अब बसपा में मायावती जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं। और, इलाहाबाद से ही लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहे हैं। &lt;br /&gt;राहुल गांधी को शायद उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी की असली हैसियत का अंदाजा और इसे फिर से मजबूत करने में आने वाली असली मुश्किल भी पता चल गई होगी। इसीलिए जाते-जाते राहुल ने कहा- हमें अपनी पार्टी के भीतरघातियों से सबसे ज्यादा परेशानी हो सकती है। अब अगर ये बात प्रदेश के बड़े कांग्रेसियों की समझ में आती है तो, शायद राहुल की उत्तर प्रदेश योजना लोकसभा चुनावों में कुछ असर कर पाए। क्योंकि, रीता बहुगुणा जोशी और दिग्विजय सिंह लोगों को जोड़ने और राजनीतिक जोड़-तोड़ की बेजोड़ क्षमता तो रखते ही हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-3296859352414346854?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/3296859352414346854/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=3296859352414346854' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/3296859352414346854'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/3296859352414346854'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2007/11/blog-post_13.html' title='राहुल गांधी को पता चल गया होगा कि उत्तर प्रदेश में असली मुश्किल क्या है'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-4024419103073650570</id><published>2007-11-09T12:30:00.000+05:30</published><updated>2007-11-28T08:24:30.735+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='कलराज मिश्र'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='भाजपा'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='कल्याण सिंह'/><title type='text'>क्या आपको कल्याण सिंह-कलराज मिश्र याद हैं?</title><content type='html'>जी हां, मैं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की ही बात कर रहा हूं। 1991 में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी के नेता कल्याण सिंह। वही हर बात पर, सौगंध राम की खाते हैं, मंदिर वहीं बनाएंगे का नारा लगाने वाले कल्याण सिंह। क्या आपको पता है कि कल्याण सिंह अब क्या कर रहे हैं। &lt;br /&gt;कलराज मिश्र, जी हां, वही जो भाजपा में संगठन का काम संभालने के उस्ताद माने जाते थे। लेकिन, कभी भी आजतक एक बार भी विधानसभा का चुनाव नहीं जीत पाए, विधानपरिषद और राज्यसभा के जरिए ही सत्ता का सुख लेते रहे। कलराज मिश्र और कल्याण सिंह को आपने कितने दिनों-महीनों से किसी टीवी चैनल या फिर अखबार में कोई बयानबाजी करते नहीं देखा। शायद महीनों से नहीं। अखबारों के स्थानीय संस्करणों में छपने को छोड़ दे तो। &lt;br /&gt;अब सवाल ये है कि मैं आज अचानक इन दोनों नेताओं की चर्चा क्यों कर रहा हूं, जब मीडिया, इनकी अपनी पार्टी के कार्यकर्ता और जनता भी इन्हें नहीं पूछ रही। दरअसल इसी सवाल की वजह से मुझे इन दोनों नेताओं की याद आ गई। &lt;br /&gt;6 दिसंबर 1992 को जब विवादित बाबरी ढांचा ढहाए जाने के बाद कल्याण सिंह सहित देश के 4 राज्यों की भाजपा सरकारें बर्खास्त कर दी गईं। उसके बाद भाजपा नेताओं के बीच सत्ता पाने के खेल में जो केल शुरू हुआ वही आज, वजह बन गया है कि इन दोनों नेताओं को याद करना पड़ रहा है कि वो कहां हैं। उत्तर प्रदेश भाजपा के बारे में मुझे जितनी जानकारी है- कल्याण सिंह और कलराज मिश्र की ही कार्यकुशलता का नतीजा था कि राज्य में बीजेपी राम लहर का फायदा उठाने में कामयाब हो पाई। &lt;br /&gt;लेकिन, एक बार जब सत्ता का स्वाद इन्हें लगा तो, इन दोनों नेताओं के बीच शुरू हुई अहम की लड़ाई ने बीजेपी का बेड़ा गर्क कर दिया। अब तो, हाल ये है कि भाजपा कार्यालय पर इन दोनों नेताओं के आने पर भाजपा की नई पांत के नेता इन पर ध्यान देना भी मुनासिब नहीं समझते। लेकिन, अभी भी सच्चाई यही है कि इन दोनों नेताओं के भाजपा में किनारे पर होने की ही वजह है कि राज्य में भाजपा इतना किनारे हो गई है कि तीसरे नंबर की एक लगातार कमजोर होती पार्टी भर बन गई है। &lt;br /&gt;भाजपा कार्यकर्ताओं को न तो, संगठन के किसी नेता पर भरोसा रह गया है। और, न ही राज्य में उन्हें कोई नेता नजर आ रहा है जो, मुख्यमंत्री पद के लिए मुलायम, मायावती के सामने दम से खड़ा हो सके। आज राजनाथ सिंह राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं जो, कल्याण सिंह की सरकार में शिक्षा मंत्री थे तो, रमापति राम त्रिपाठी प्रदेश अध्यक्ष हैं जो, कलराज मिश्र के प्रदेश अध्यक्ष रहते जिलाध्यक्ष से प्रदेश महामंत्री की कुर्सी तक जा पहुंचे। &lt;br /&gt;राजनाथ सिंह राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं लेकिन, अभी भी उत्तर प्रदेश के किसी भी विधानसभा क्षेत्र में 5 हजार लोगों की भी भीड़ अपने अकेले के दम पर नहीं जुटा पाते हैं। वोट कितना दिला पाते हैं इसका अंदाजा तो, विधानसभा के इस चुनाव से सबको लग ही गया होगा। कल्याण सिंह और कलराज मिश्र की जोड़ी की जमीनी मजबूती का ही कमाल था कि भारत मां की तीन धरोहर – अटल-आडवाणी-मुरली मनोहर के लिए भाजपा कार्यकर्ता पलक पांवड़े बिछाए बैठे रहते थे। अब कोई इनको भी नहीं पूछ रहा। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में जोश भरने वाला कोई है ही नहीं। &lt;br /&gt;इन दोनों ने अपने अहम की लड़ाई में खुद के राजनीतिक करियर के साथ ही भाजपा की भी जमीन खिसका दी। संघ के जातिवाद को खत्म करने के आदर्शों पर सामाजिक जीवन का काम शुरू करने वाले कल्याण लोधों के और कलराज मिश्र सिर्फ ब्राह्मणों के नेता बनने की कोशिश करने लगे। इस कोशिश में ये कितना सफल हुए इसके लिए बस ये मुहावरा ही काफी है कि – धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का। &lt;br /&gt;बीच में कल्याण सिंह कुसुम राय के प्रेमपाश (आरोप ऐसे ही लगते रहे हैं) में ऐसे फंसे कि संघ, भाजपा और अटल बिहारी उन्हें दागदार नजर आने लगे। राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बनाकर कल्याण सिंह ने मुलायम से भी हाथ मिलाने में परहेज नहीं किया। हिंदुत्व के पुरोधा को जब सिर्फ 4 सीटें मिलीं तो, उनका दिमाग ठिकाने आया लेकिन, कुसुम राय की क्रांति ऐसी कि भाजपा में कुसुम को साथ लाने की शर्त पर ही लौटे। &lt;br /&gt;इस विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश भाजपा में संगठन मंत्री की जिम्मेदारी निभा रहे नागेंद्र नाथ ने नए लोगों को चुनाव में उतारकर प्रयोग करने की कोशिश की। नागेंद्र नाथ उत्तर प्रदेश और बिहार में विद्यार्थी परिषद के मुखिया रह चुके हैं और उन्होंने ABVP को लखनऊ, इलाहाबाद, बनारस और गोरखपुर विश्वविद्यालय में परिषद को स्थापित करने के लिए कई नए प्रयोग किए थे। उनके समय में तैयार हुआ विद्यार्थी परिषद का नेटवर्क अब उत्तर प्रदेश भाजपा में काम कर रहा है। नागेंद्र नाथ ने इस नौजवान टीम के 20 से ज्यादा लोगों को विधानसभा में टिकट दिया। &lt;br /&gt;लेकिन, चुनाव में उत्तर प्रदेश भाजपा के पास न तो कोई मजबूत चेहरा था। न ही संगठन को संजोने वाला कोई नेता। उसकी वजह से विश्वविद्यालय की राजनीति से विधानसभा की राजनीति करने पहुंचे नेताओं को कोई ढंग का आधार ही नहीं मिल पाया। अब सवाल ये है कि मैं कल्याण-कलराज को याद क्यों कर रहा हूं। भाजपा के मजबूत होने का आधार क्यों ढूंढ़ रहा हूं। &lt;br /&gt;दरअसल हम जैसे लोग जो, उत्तर प्रदेश को मायावती के सत्ता में आने के बाद सुधरता हुआ देख रहे थे। आनदंसेन यादव जैसे प्रकरणों के बाद हम जैसे लोगों को लग रहा है कि प्रदेश में मुलायम, मायावती के अलावा तीसरा कोई ध्रुव न होने से ये नेता निरंकुश हो गए हैं। और, इस बात से तो शायद ही किसी को संदेह होगा कि कल्याण सिंह से इमानदार मुख्यमंत्री शायद ही कोई हो। कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री रहते अपराधी और भ्रष्टाचारियों की तो प्रदेश में सिर उठाने की हिम्मत नहीं ही पड़ती।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-4024419103073650570?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/4024419103073650570/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=4024419103073650570' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/4024419103073650570'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/4024419103073650570'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2007/11/blog-post_2518.html' title='क्या आपको कल्याण सिंह-कलराज मिश्र याद हैं?'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-5782317535176977885</id><published>2007-11-09T11:26:00.000+05:30</published><updated>2007-11-28T08:23:47.744+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मायाराज'/><title type='text'>मुलायम के रास्ते पर जाती मायावती</title><content type='html'>उत्तर प्रदेश के लोगों को ये भरोसा हो गया था कि मायावती ही वो नेता हैं जो, प्रदेश से मुलायम सिंह यादव और उनके गंडों का आतंकराज खत्म कर सकती हैं। मायावती ने भी दहाड़-दहाड़कर ये जताया कि वही अकेली नेता हैं जो, सपा के राज में खत्म हो गए कानून के राज को फिर से वापस ला सकती हैं। लेकिन, 6 महीने बीतते-बीतते ही माया की सत्ता का असली रंग दिखना शुरू हो गया है।&lt;br /&gt;उत्तर प्रदेश के एक मंत्री आनंदसेन यादव के ऊपर आरोप है कि उन्होंने फैजाबाद में विधि स्नातक की छात्रा शशि के साथ अनैतिक संबंध कायम किए (अब तो मैं भ्रम में पड़ गया हूं कि ये अब अनैतिक रहा भी है क्या) फिर एक दिन अचानक शशि गायब हो गई। अंदेशा है कि उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस शशि की लाश अब तक नहीं खोज पाई है।&lt;br /&gt;जब मीडिया में बहुत हल्ला होने लगा तो, आनंदसेन को मायावती ने इस्तीफा देने के लिए कह दिया। एक दिन बाद मंत्री आनंदसेन ने इस्तीफा तो दे दिया। लेकिन, आश्चर्य है कि अब तक मंत्री आनंदसेन यादव के खिलाफ कोई जांच ही नहीं शुरू हुई है। जबकि, अब तक मिले सुबूतों से साफ है कि गायब होने से पहले शशि सुल्तानपुर में मंत्री आनंदसेन के साथ देखी गई थी। लेकिन, पुलिस सिर्फ शशि की लाश खोजने में लगी है। हां, आनंदसेन के ड्राइवर से जरूर पूछताछ चल रही है। &lt;br /&gt;अब सवाल ये है कि अगर आनंदसेन को सरकार दोषी नहीं मानती तो, उनसे इस्तीफा लेने की क्या जरूरत थी। और, अगर इस्तीफे का आधार आरोपी होना है तो, फिर एफआईआर में आनंदसेन का नाम क्यों नहीं है। शशि के पिता योगेंद्र कुमार साफ-साफ कह रहे हैं कि उनकी बेटी की हत्या आनंदसेन यादव ने करवाई है। टीवी पर रोते हुए योगेंद्र कुमार के बगल में हमेशा मायावती के आदर्श डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की बड़ी तस्वीर दिखती है। योगेंद्र कुमार रोते हुए बार-बार कह रहे हैं कि वो बरसों से बहुजन समाज पार्टी की झंडा उठा रहे हैं लेकिन, उसी पार्टी की सरकार में उनकी बेटी की इज्जत गई, अब जान भी जाती दिख रही है। &lt;br /&gt;उत्तर प्रदेश में सारे समीकरणों को तोड़कर जनता ने मायावती को भय, भ्रष्टाचार और आतंक के खिलाफ पूर्ण बहुमत दिया। मायावती को सत्ता मिली तो, माया ने कहा – मायाराज में मलायम राज का भय, भ्रष्टाचार और आतंक-जंगलराज पूरी तरह से खत्म होगा। महीने भर में ही मुलायम के गुंडे अंदर हो गए। कानून का राज दिखने लगा। और, अब उत्तर प्रदेश में सिर्फ मायावती के लोगों को भय, भ्रष्टाचार और आतंकराज चल रहा है। मुलायम राज का भय, भ्रष्टाचार और आतंकराज खत्म हो गया। मैडम मायावती ने अपना चुनावी वादा पूरा कर दिया। &lt;br /&gt;कुल मिलाकर मायावती, मुलायम के ही रास्ते पर जाती दिख रही हैं। इलाहाबाद में इफको फैक्ट्री में वसूली के लिए गए गुंडों में बसपा के एक स्थानीय नेता का भाई भी शामिल था। ऐसा हाल लगभग राज्य के हर जिले में दिख रहा है। यानी उत्तर प्रदेश के लोगों के दिन बहुरने में अभी जाने कितना वक्त लगेगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-5782317535176977885?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/5782317535176977885/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=5782317535176977885' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/5782317535176977885'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/5782317535176977885'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2007/11/blog-post_08.html' title='मुलायम के रास्ते पर जाती मायावती'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-7092725710922088700</id><published>2007-11-06T20:29:00.000+05:30</published><updated>2007-11-28T08:23:15.304+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मायाराज'/><title type='text'>‘मुलायम’ ‘राहुल’ पर ‘माया’ सख्त</title><content type='html'>राहुल गांधी के आगे भले ही देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्री सिर नवाए खड़े रहते हों लेकिन, राहुल अपने संसदीय क्षेत्र एक सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर के आगे बेबस नजर आ रहे हैं। वो, भी एक ऐसा इंजीनियर जिसके खिलाफ खराब तरीके से काम करने के ढेर सारे आरोप हैं। लेकिन, इस सबके बावजूद राहुल गांधी की सिफारिश कूड़े में पड़ी है। और, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर बाबूराम राहुल के चुनाव क्षेत्र में मूंछे ऐंठकर मजे से काम कर रहा है। &lt;br /&gt;दरअसल राहुल गांधी अमेठी से सांसद तो हैं ही। सुल्तानपुर की डिस्ट्रिक्ट विजिलेंस एंड मॉनिटरिंग कमेटी के चेयरमैन भी हैं। जल निगम के सुपिरंटेंडिंग इंजीनियर (अधीक्षण अभियंता) के खिलाफ गलत तरीके से काम कराने की शिकायत के बाद राहुल गांधी ने बाबूराम को सस्पेंड करने की सिफारिश कर दी। सुल्तानपुर के जिलाधिकारी ने राहुल की सिफारिश को आगे बढ़ाते हुए बाबूराम के सस्पेंशन की फाइल उत्तर प्रदेश शहरी विकास विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी के पास भेजी। लेकिन, 27 जुलाई को भेजी गई इस सिफारिश पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। &lt;br /&gt;आमतौर पर ये कम ही होता है कि डिस्ट्रिक्ट विजिलेंस एंड मॉनिटरिंग कमेटी की सिफारिशें न मानी जाएं। इसमें सभी पार्टियों के सांसद-विधायक शामिल होते हैं। लेकिन, इस मामले में शायद मायाराज के अधिकारियों को ये लगता है कि राज्य के किसी अधिकारी को कांग्रेस के किसी सांसद की सिफारिश पर हटाना राजनीतिक तौर पर नुकसान का फैसला हो सकता है। वो, भी जब राहुल गांधी जैसा सांसद हो तो, स्वाभाविक है, इसका राजनीतिक फायदा-नुकसान तो होगा ही। &lt;br /&gt;ये बहुत छोटा सा मामला है। लेकिन, इस एक मामले से समझा जा सकता है कि दिल्ली में मायावती भले ही सोनिया से मुस्कुराते हुए मिलें। और, अपनी जरूरतों के लिहाज से समझौते करें। लेकिन, उत्तर प्रदेश की सत्ता की एक छटांक भी किसी कांग्रेसी के हिस्से वो नहीं जाने देंगी। साथ ही इससे एक बात और साफ है कि मायाराज का भ्रष्टाचार दूसरे तरीके से चालू आहे। बाबूराम के खिलाफ  शिकायत है कि उन्होंने कई हैंडपंप की बोरिंग के बाद बिना हैंडपंप लगे ही पूरा पैसा रिलीज कर दिया। और, बिना पंप के 6 महीने से बोरिंग हुई पड़ी है। &lt;br /&gt;ऐसे सरकारी हैंडपंप ज्यादातर उन्ही जगहों पर लगते हैं जहां, आर्थिक तौर पर कमजोर लोग रहते हैं। यानी जिनके पास अपना हैंडपंप लगवाने के पैसे नहीं हैं। इसमें से ज्यादातर लोग वो, हैं जो, मायावती का नीला झंडा उठाए लखनऊ में सरकारी पैसे से हुई रैली में मायावती को सुनने भी गए होंगे। अब जब मायावती अपने वोटबैंक की भी सुध नहीं ले रही हैं तो, फिर औरों की क्या बिसात है। और, राहुल के कद के आदमी की जब एक साधारण से भ्रष्ट अधीक्षण अभियंता पर नहीं चल रही है तो, आम आदमी के लिए तो, फरियाद के रास्ते भी बंद हो जाते हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-7092725710922088700?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/7092725710922088700/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=7092725710922088700' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/7092725710922088700'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/7092725710922088700'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2007/11/blog-post_06.html' title='‘मुलायम’ ‘राहुल’ पर ‘माया’ सख्त'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-672632967421030273</id><published>2007-11-03T08:23:00.000+05:30</published><updated>2007-11-28T08:21:49.455+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मुलायम राज'/><title type='text'>भ्रष्टाचार, अपराध से बरबाद हुआ राज्य उत्तर प्रदेश</title><content type='html'>&lt;strong&gt;Thursday, October 11, 2007&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;!--chitthajagat claim code--&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://www.chitthajagat.in/?claim=rdadbceoc8d7" title="चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी"&gt;&lt;img src="http://www.chitthajagat.in/images/claim.gif" border="0" alt="चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी" title="चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी";&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;!--chitthajagat claim code--&gt;&lt;br /&gt;किसी राज्य में भ्रष्टाचार और अपराध की जड़ें मजबूत होने से किस तरह का नुकसान होता है, इसका उत्तर प्रदेश से बेहतर उदाहरण शायद ही कोई और राज्य है। वैसे तो, उत्तर प्रदेश पिछले दो दशकों से किसी मामले में शायद ही तरक्की कर पाया हो लेकिन, पिछले पांच सालों में रही-सही कसर भी पूरी हो गई। अपराध-भ्रष्टाचार इस राज्य में इस तरह से सिस्टम का अंग बन गए कि सरकार और अपराधियों में अंतर कर पाना मुश्किल हो गया। और, इसका सीधा असर पड़ा राज्य के विकास पर। उत्तर प्रदेश ऐसा पिछड़ गया है कि रफ्तार पकड़ने में जाने कितने साल लगेंगे।&lt;br /&gt;देश की 16 प्रतिशत आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश अपराध के मामले अव्वल है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक, देश के 24 प्रतिशत हिंसक अपराध उत्तर प्रदेश के ही हिस्से में आ रहा है। ऐसे में प्रति व्यक्ति के आधार पर देखें तो, ज्यादा बदनाम राज्य बिहार भी इससे पीछे छूट चुका है। इस सबका असर ये है कि जब 1990 के बाद देश में तरक्की की रफ्तार सबसे तेजी है, जब ये कहा जा रहा है कि पैसा बरस रहा है कोई भी बटोर ले, उत्तर प्रदेश में व्यापार करना ज्यादातर मामलों में घाटे का सौदा साबित हो रहा है। देश जब आठ प्रतिशत से ज्यादा की रफ्तार से तरक्की कर रहा है तो, उत्तर प्रदेश सिर्फ 5 प्रतिशत की ही रफ्तार मुश्किल से पकड़ पा रहा है। &lt;br /&gt;CII यानी कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री के एक आंकड़े के मुताबिक, 2004 में देश में जब घरेलू खपत प्रति व्यक्ति 18.912 रुपए थ तो, उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति घरेलू खपत करीब आधी यानी सिर्फ 9,900 रुपए थी। साफ है इंडस्ट्री तो बरबाद हुई ही लोगों की जेब में भी पैसा नहीं है। इसकी वजह भी साफ है उत्तर प्रदेश में 2005 में हिंसक अपराध 38 प्रतिशत बढ़ गए। व्यापार करने के लिए सरकारी तंत्र के साथ ही माफियाओं-बदमाशों से भी “नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट” लेना पड़ता है। बौद्धिक-धार्मिक नगरी इलाहाबाद में ही सिर्फ 2005 में 100 से ज्यादा हत्याएं दर्ज की गई हैं जबकि 60 अपहरण के मामले पता चले। &lt;br /&gt;ऐसे माहौल में कोई और व्यापार चले न चले। लोगों को सुरक्षा देने का धंधा खूब चल रहा है। सिर्फ एक एजेंसी उत्तर प्रदेश पूर्व सैनिक कल्याण निगम के 12,000 सिक्योरिटी गार्ड लोगों की निजी सुरक्षा में लगे हैं। जबकि, इस एजेंसी के पास 1999 में सिर्फ 250 सिक्योरिटी गार्ड थे। ये हाल तब है जब उत्तर प्रदेश में ज्यादातर इलाकों में निजी असलहे रखना फैशन स्टेटमेंट माना जाता है। &lt;br /&gt;इस राज्य में इंडस्ट्री कैसे आगे बढ़ सकती है। इसका बड़ा उदाहरण सिर्फ इसी से लगाया जा सकता है कि इस राज्य में 2 राज्य राजमार्गों की हालत 20 साल पहले जैसी ही बुरी बनी हुई है। मुझे याद है कि एक बार मैं उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बस से इलाहाबाद से गोरखपुर गया था। इस सफर के बाद मुझे अंदाजा लग गया कि जौनपुर में रहने वाले मेरे दोस्त अपने घर जाने से पहले ये क्यों कहते थे कि कॉम्बीफ्लाम (दर्द दूर करने की दवा) ले लिया है ना।&lt;br /&gt;इलाहाबाद से जौनपुर का रास्ता करीब साल भर से तो, चौड़ा होने के लिए खुदा हुआ है। ऐसा ही हाल है इलाहाबाद से सुल्तानपुर को जोड़ने वाले रास्ते में प्रतापगढ़ से सुल्तानपुर का। समझ में नहीं आता कि ये रास्ते क्या किसी नेता की विधानसभा-लोकसभा में नहीं आते। आखिर इन्हीं रास्तों से तो नेताजी-अधिकारी लोगों को भी तो आना जाना पड़ता है। &lt;br /&gt;मायावती ने राज्य की सत्ता संभालते ही राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त, अपराध मुक्त करने का भरोसा दिलाया था। लेकिन, तीन महीने में तो कुछ तस्वीर बदलती नहीं दिखी है। अब उम्मीद यही कर सकते हैं कि अपनी सत्ता बचाए रखने और लोकसभा चुनावों में सीट बढ़ाने के लिए विधानसभा चुनाव के समय किए गए वादे मायावती पूरा करेंगी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-672632967421030273?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/672632967421030273/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=672632967421030273' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/672632967421030273'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/672632967421030273'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2007/11/blog-post_3854.html' title='भ्रष्टाचार, अपराध से बरबाद हुआ राज्य उत्तर प्रदेश'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-8989207543670479726</id><published>2007-11-03T08:22:00.000+05:30</published><updated>2007-11-28T08:21:28.172+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मुलायम राज'/><title type='text'>बेशर्मी की हदें टूट गईं मुलायम राज में</title><content type='html'>&lt;strong&gt;Sunday, September 30, 2007&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;उत्तर प्रदेश में जिस्म बेचकर सिपाही की नौकरी मिली। ये सब उस समय हुआ जब मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। पुलिस भर्ती घोटाले की जांच में अब तक का ये सबसे चौंकाने वाला और शर्मनाक तथ्य सामने आया है। मामले के जांच अधिकारी शैलजाकांत मिश्रा पत्रकारों को ये बात बताते हुए खुद शर्म महसूस कर रहे थे। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान सिपाही की भर्ती में शामिल हुई कई लड़कियों ने उनसे बताया कि उन्हें सिपाही बनाने के एवज में बिस्तर गर्म करने को कहा गया। जब ऐसा चल रहा हो तो, जाहिर है जिसने भी मना किया वो, सिपाही की सूची से बाहर हो गया।&lt;br /&gt;उत्तर प्रदेश में गलत तरीके से नौकरी पाने वाले 18,000 सिपाहियों की भर्ती अब तक मायावती रद्द कर चुकी हैं। पहले 6504 सिपाहियों की भर्ती रद्द हुई, अब 7,400। 25 IPS अफसर भी निलंबित किए जा चुके हैं। बड़े पुलिस अधिकारियों की भी गर्दन जब मायावती ने नापनी शुरू की तो, मुलायम इसे अपने ऊपर राजनीतिक हमला बता रहे थे। वैसे मुलायम अभी भी बेशर्मी के साथ कह रहे हैं कि सब कुछ राजनीतिक साजिश है। वो, मायावती को चेतावनी भी दे रहे हैं कि मायावती की भी सरकार जाएगी। अच्छा है मुलायम बार-बार मायावती को ये चेतावनी दे रहे हैं। इससे कम से कम मायावती के राज में तो ऐसा नंगा नाच नहीं होगा। जिससे अगली सरकार मायावती की खाल उधेड़ने की कोशिश करे। &lt;br /&gt;खैर, बात मुलायम राज में हुई गंदगी की चल रही थी। सिपाही भर्ती घोटाले की जांच कर रहे शैलजाकांत ने बताया है कि इसमें पुलिस के बड़े अफसरों के अलावा एक बड़े नेता का नाम भी सामने आया है। अभी वो इसे बताने को तैयार नहीं हैं। लेकिन, उत्तर प्रदेश को जानने वाले ज्यादातर लोग उन नेताजी का नाम जानते ही होंगे। वैसे किसी नेता के शामिल हुए बिना कोई भी पुलिस अधिकारी अपने स्तर पर इतना बड़ा घोटाला कर सकता है, ये तो संभव ही नहीं था। नेता भी कोई ऐसा ही होगा जो, सत्ता के दरबार में सबसे ज्यादा हनक रखता हो। &lt;br /&gt;लखनऊ में इन्हीं नेताजी के घर पर तय हुआ कि किस-किस को सिपाही की वर्दी देनी है। एक निजी एजेंसी के हाथ में रिजल्ट बनाने का जिम्मा था। हद ये हुई कि किसी अधिकारी के बिना हस्ताक्षर के ही सूची जारी की गई। वैसे जारी करने से पहले मुलायम राज में सत्ता के सबसे ऊंचे पायदान पर बैठे नेताजी ने कई बार सूची में फेरबदल कराया। वैसे जिस तरह से मुलायम के राज में जनता त्रस्त थी। उससे तो, यही लगता है कि ये ट्रेलर भर है। फिल्म अभी बाकी है। यानी उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के छलावे के पीछे के कई कुकर्म सामने आने बाकी हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-8989207543670479726?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/8989207543670479726/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=8989207543670479726' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/8989207543670479726'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/8989207543670479726'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2007/11/blog-post_24.html' title='बेशर्मी की हदें टूट गईं मुलायम राज में'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-2339975472080396942</id><published>2007-11-03T08:21:00.000+05:30</published><updated>2007-11-28T08:22:52.862+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='विकास की राह'/><title type='text'>उत्तर प्रदेश में राजनीति के जरिए विकास का गणित</title><content type='html'>&lt;strong&gt;Wednesday, July 25, 2007&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती राज्य के विकास के लिए केंद्र सरकार से 80 हजार करोड़ रुपए मांग रही हैं। वो भी अखबारों में विज्ञापन देकर। शायद ये पहली बार हो रहा है कि कोई मुख्यमंत्री केंद्र सरकार से राज्य के विकास के लिए विज्ञापन के जरिए पैसे मांग रहा है। इस बार सरकार संभालने के साथ ही मायावती ने इस बात की कोशिश शुरू कर दी थी कि राज्य का विकास कैसे किया जाए (कम से कम बोलकर)। जब मायावती राज्य की मुख्यमंत्री बनी थीं, तभी से लोग इस बात का अंदाजा लगाने लगे थे कि आखिर मायावती केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार को समर्थन देकर क्या हासिल करना चाहती हैं। लोगों को लग यही रहा था कि केंद्र सरकार को मायावती का ये समर्थन कहीं सिर्फ राजनीतिक या व्यक्तिगत लाभ तक ही न सीमित रह जाए। लेकिन, इस बार मायावती साफ संदेश दे रही हैं कि वो लंबी पारी खेलने के मूड में है। और, वो उत्तर प्रदेश के जरिए पूरे देश में ये संदेश दे रही हैं कि उन्हें इस बात अच्छी तरह अहसास है कि जिस सर्वजन के फॉर्मूले पर चुनाव जीतकर वो यूपी में सत्ता में आई हैं, आगे के पांच साल का शासन सिर्फ उसी के बूते नहीं हो सकता।&lt;br /&gt;मायावती के हाथ में एक ऐसे राज्य की बागडोर है जो, मानव संसाधन से तो, पूरी तरह संपन्न है। राज्य की आबादी 18 करोड़ हो चुकी है। लेकिन, इसके अलावा राज्य के पास ऐसा कुछ खास नहीं है जिससे वो विकास के मामले में दक्षिण और पश्चिम के राज्यों के आसपास भी खड़ा हो सके। उत्तर प्रदेश ऐसा राज्य है जहां एग्री बेस्ड इंडस्ट्री ही अच्छे से चल सकती है। खेती पर आधारित उद्योग इसलिए भी सफल हो सकते हैं क्योंकि, उत्तर प्रदेश उन राज्यों में से है जो, जल संपदा के मामले में संपन्न हैं। देश की 9 प्रतिशत जमीन उत्तर प्रदेश के पास ही है। इसीलिए खेती पर आधारित चीनी उद्योग के मामले में उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर है। फल-सब्जियां उगाने के मामले में भी उत्तर प्रदेश आगे है। लेकिन, चीनी को लेकर सरकारों की गलत नीतियों के चलते सभी चीनी घाटा उठा रही हैं। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि मायावती ने नफा-नुकसान का हिसाब लगाकर समझ लिया कि इन्हें चलाना अब सरकार के लिए किसी भी तरह से फायदे का सौदा नहीं है। इसलिए मायावती ने चीनी मिलों को उद्योगपतियों को बेचने का फैसला किया है। औद्योगिक सुधार की मायावती सरकार की नीति का ये पहला प्रभावी कदम है।&lt;br /&gt;राज्य के विकास के लिए केंद्र से मांगे गए 80 हजार करोड़ रुपए में 22 हजार करोड़ रुपए मायावती ने बेहतर खेती की सुविधाओं पर खर्च करने के लिए ही मांगे हैं। राज्य की बड़ी आबादी अभी भी गांवों में रहती है इसलिए गांवों तक सभी सभी विकास योजनाएं समय से पहुंचे ये, राज्य के तेज विकास के लिए बहुत जरूरी है। गांव में पंचायती राज लागू करने और सुविधाएं बेहतर करने के लिए मायावती ने 6 हजार 5 सौ करोड़ रुपए मांगे हैं। खेती की सुविधा और गांव-पंचायती राज पर अगर 28 हजार 5 सौ करोड़ रुपए की ये रकम सलीके से खर्च हो पाई तो, शायद विकास की गाड़ी दौड़नी तो, शुरू हो ही जाएगी।&lt;br /&gt;वैसे मुलायम सिंह यादव के राज में भी उत्तर प्रदेश के विकास के लिए उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निगम बना था। और, अमर सिंह, अमिताभ बच्चन और अनिल अंबानी के प्रभाव में देश के कई बड़े औद्योगिक घराने इसमें शामिल भी हो गए थे। लेकिन, अनिल अंबानी के दादरी प्रोजेक्ट को छोड़कर एक भी ऐसा प्रोजेक्ट सुनाई नहीं दिया जिससे राज्य की बेहतरी की उम्मीद की जा सकती। मुलायम सत्ता का सुख भोगकर सत्ता से बाहर भी हो गए लेकिन, राज्य का भला नहीं हो सका। राज्य की खराब कानून व्यवस्था की हालत की वजह से किसी भी उद्योगपति की राज्य में उद्योग लगाने की हिम्मत ही नहीं हुई। कानपुर, भदोही, बनारस, मुरादाबाद जैसे पुराने औद्योगिक नगर भी सिर्फ सरकारी वसूली का केंद्र बनकर रह गए। बची-खुची कसर पूरी कर दी केंद्र सरकार से खराब रिश्तों ने। जिससे केंद्र से आने वाली विकास की धारा भी रुक गई।&lt;br /&gt;अब मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री हैं। सामाजिक समीकरण भी ऐसे बन गए हैं कि कहीं से भी मायावती के खिलाफत के स्वर अभी सुनाई नहीं दे रहे हैं। केंद्र सरकार से मायावती के रिश्ते राष्ट्रपति चुनाव के बाद और भी बेहतर हो गए हैं। लेफ्ट पार्टियों को संतुलित रखने के लिए मायावती सोनिया के लिए बेहतर साबित हो सकती हैं, इसलिए आगे भी मायावती और सोनिया मैडम के रिश्ते बेहतर होते ही दिख रहे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, मायावती के सत्ता में आते ही दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बीच बसों का विवाद सुलझ गया। ये सांकेतिक ही था लेकिन, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सीमा जिस तरह से सटी हुई है, उसमें दिल्ली से अच्छे संबंध राज्य के विकास की गाड़ी दौड़ाने में मददगार हो सकते हैं।&lt;br /&gt;मायावती के केंद्र से अच्छे रिश्तों की वजह से ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उत्तर प्रदेश में विकास की संभावनाएं खोजने के लिए एक कमेटी भी बना दी है। इस कमेटी की रिपोर्ट में जो सबसे जरूरी बात निकलकर आई है कि कानून व्यवस्था की हालत दुरुस्त हुए बिना राज्य में कोई भी पैसे लगाने को तैयार नहीं होगा। और, मायावती ने सत्ता संभालते ही ये दिखा दिया है कि कानून तोड़ने वाले बख्शे नहीं जाएंगे, चाहे वो कोई भी हों। उत्तर भारत के वीरप्पन कहे जाने वाले ददुआ ने पिछले तीस सालों में हर सरकार को ठेंगा दिखाया, वो मारा गया। इलाहाबाद की फूलपुर सीट से लोकसभा सांसद अतीक अहमद को हत्या के मामले में भगोड़ा घोषित कर दिया गया है। माफिया अतीक अहमद का छोटा भाई अशरफ भी बसपा के इलाहाबाद शहर पश्चिमी से विधायक रहे राजू पाल की हत्या के इसी मामले में आरोपी है। वैसे इन मामलों में लोग समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए थे। लेकिन, मायावती के इस साहस का स्वागत किया जाना चाहिए। वैसे मायावती ने अपनी पार्टी के सांसद उमाकांत यादव को भी नहीं बख्शा है, जमीन कब्जे की कोशिश में वो जेल भेज दिए गए। कुल मिलाकर मायावती विकास की पहली जरूरी शर्त पूरी कर रही हैं। लेकिन, विकास की सबसे जरूरी शर्त है राज्य में सड़क-पानी-बिजली यानी बुनियादी सुविधाओं का ठीक होना। इन सभी मानकों पर उत्तर प्रदेश देश के दूसरे राज्यों से पीछे जाने की रेस लगाता दिखता है।&lt;br /&gt;केंद्र सरकार की कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश तो, विकास के मामले में फिर भी बेहतर है लेकिन, बुंदेलखंड और पूर्वांचल का हाल तो, एकदम ही बुरा है। इसीलिए मायावती ने पूर्वांचल के इलाकों में सड़क-बिजली-पानी की सुविधा ठीक करने के लिए 9 हजार 4 सौ करोड़ रुपए और बुंदेलखंड में इस काम के लिए 4 हजार 7 सौ करोड़ रुपए मांगे हैं। लेकिन, इन सबके साथ ही मायावती को एक काम जो, और विकास के लिए तेजी से करना होगा वो, है पहले से चल रही केंद्र की विकास योजनाओं को तेजी से पूरा करना। उत्तर प्रदेश और बिहार वो राज्य हैं जहां एनडीए के शासनकाल में शुरू हुई स्वर्णिम चतुर्भुज योजना का काम सबसे धीमे चल रहा है। दिल्ली से कोलकाता के 8 लेन वाले इस रास्ते में उत्तर प्रदेश का बड़ा हिस्सा आता है। कानपुर और बनारस जैसे औद्योगिक विकास की संभावनाओं वाले शहर इससे जुड़ रहे हैं।&lt;br /&gt;अपने सर्वजन हिताय के चुनाव जिताऊ फॉर्मूले को ध्यान में रखकर मायावती ने राज्य में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले SC/ST/OBC और अल्पसंख्यकों के साथ ऊंची जातियों का जीवन स्तर बेहतर करने के लिए 23 हजार 8 सौ करोड़ रुपए मांगे है। ये अच्छा है कि लोगों की बेहतरी में जाति आड़े नहीं आ रही है। मायावती ने विज्ञापन के जरिए केंद्र सरकार से ये भी अपील की है कि देश में खाली पड़े सभी आरक्षित पदों को भरा जाए। चमत्कार ये है कि मायावती ने उसी विज्ञापन में गरीबी रेखा के नीचे की ऊंची जातियों को भी आरक्षण का लाभ देने के लिए संविधान में संशोधन की भी मांग की है। कुल मिलाकर मायावती और सोनिया मैडम की राजनीतिक जरूरतों के लिहाज से जो रिश्ते बन रहे हैं, उसमें ये रकम मायावती को आसानी से मिल जाएगी। क्योंकि, असली परीक्षा तो, यही होगी क्या मायावती उत्तर प्रदेश को BIMARU राज्य की श्रेणी से बाहर ला पाएगीं। उनके पड़ोसी नीतीश कुमार बिहार को इस दाग से बाहर निकालने के लिए जी-जान से जुटे हुए हैं।&lt;br /&gt;वैसे उत्तर प्रदेश का विकास मायावती के साथ केंद्र सरकार की भी मजबूरी है। क्योंकि, देश के सबसे बड़े प्रदेश के पिछड़े रहने पर मनमोहन-चिदंबरम की जोड़ी देश की अर्थव्यवस्था को कैसे भी करके 10 प्रतिशत की विकास की रफ्तार नहीं दे पाएगी। लेकिन, राज्य के विकास की ज्यादा जरूरत मायावती के लिए इसलिए भी है कि पांच साल बाद सिर्फ ब्राह्मण, SC/ST, अल्पसंख्यक के जोड़ से उन्हें फिर सत्ता नहीं मिलने वाली। और, इससे पहले 2009 के लोकसभी चुनाव में उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं होगा। क्योंकि, गुंडाराज से मुक्त जनता को दो जून की रोटी भी चाहिए। और, अगर उत्तर प्रदेश के निवासियों को घर में ही दो जून की रोटी के साथ अच्छी सड़क, जरूरत का बिजली-पानी और उनके हिस्से की विकास की खुराद मिले तो, फिर भला मुंबई में टैक्सी चलाकर मराठियों की गाली और असम में मजदूरी करके उल्फा की गोली कौन खाना चाहेगा। कुल मिलाकर पिछले ढाई दशक में राजनीति ने उत्तर प्रदेश का बेड़ा गर्क कर दिया। अब शायद समय चक्र घूम चुका है। अब राजनीति की ही मजबूरी से उत्तर प्रदेश देश में अपना खोया स्थान पा सकेगा। लेकिन, इसमें भी अगर राजनीति हावी न हो गई तो......&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-2339975472080396942?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/2339975472080396942/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=2339975472080396942' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/2339975472080396942'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/2339975472080396942'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2007/11/blog-post_4049.html' title='उत्तर प्रदेश में राजनीति के जरिए विकास का गणित'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-1574673487024142727</id><published>2007-11-03T08:20:00.000+05:30</published><updated>2007-11-28T08:22:29.064+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='आरएसएस'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='भाजपा'/><title type='text'>उत्तर प्रदेश में RSS के स्वयंसेवक फेल हुए हैं</title><content type='html'>&lt;strong&gt;Sunday, May 20, 2007&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;यूपी के चुनाव नतीजे बीजेपी की हार नहीं है। ये हार है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की। संघ के विचारों के यूपी के जातियों में बंटे धरातल पर फेल होने की। यूपी के चुनाव को बीजेपी की हार बताना RSS के और कमजोर होने का रास्ता बना रहा है। यूपी चुनाव में मायावती के पूर्ण बहुमत पाने के बाद RSS ने बीजेपी की हार की जो वजह बताई वो ये कि बीजेपी ने आधे मन से हिंदुत्व का रास्ता अपना लिया। और, मायावती ने इंदिरा गांधी के सॉफ्ट हिंदुत्व के फॉर्मूले से चुनाव जीत लिया।&lt;br /&gt;दरअसल उत्तर प्रदेश में हुआ ये परिवर्तन सिर्फ बीजेपी की हार जितना सीधा सा नहीं है। ये कुछ वैसा ही परिवर्तन है जैसा यूपी में कांग्रेस के खिलाफ 1984 के बाद हुआ था। 1984 में भी इंदिरा गांधी की हत्या की सहानुभूति की लहर न आई होती तो, शायद कांग्रेस को चेतने का समय मिल जाता। लेकिन, 1984 में कांग्रेस को बहुमत मिल गया तो, गदगद कांग्रेसी टिनोपाल लगा कुर्ता पहनकर मंचों पर गला साफ करने में जुट गए। उत्तर प्रदेश की अंदर ही अंदर बदलती जनता का कांग्रेसियों को अंदाजा ही नहीं लग रहा था। इसका सही-सही अंदाजा RSS को लग रहा था। वजह ये थी कि कांग्रेसी नेता मंचों पर थे -- बरसों की विरासत के साथ और RSS लोगों के पास जमीन में जुटकर काम कर रहा था।&lt;br /&gt;उस वक्त जो दो बातें थीं। कांग्रेसी नेताओं से जनता ऊब चुकी थी और समाज में पिछड़ी और दबी-कुचली जातियां ऊपर उठने की कोशिश कर रही थीं। संघ ने अपनी विचारधारा से लोगों को जोड़ने की कोशिश की। साथ ही पिछड़ी-दबी-कुचली जातियों को साथ लेकर अपना आधार बढ़ाने की कोशिश की। कोशिश काफी हद तक सफल भी रही। लेकिन, मंडल आंदोलन ने RSS और बीजेपी की काम बिगाड़ना शुरू कर दिया।&lt;br /&gt;1989 में RSS-बीजेपी ने समय की नजाकत समझी और मंडल-कमंडल का गठबंधन हो गया। दोनों को फायदा हुआ लोकसभा में जनता दल को 143 सीटें मिलीं और बीजेपी को 89। बीजेपी के लिए बड़ी उपलब्धि थी 1984 में सिर्फ दो संसद सदस्यों वाली पार्टी के पास लोकसभा में 89 सांसद हो गए थे। RSS की राजनीतिक शाखा उत्थान पर थी आगे संघ के प्रिय आडवाणीजी की रथयात्रा निकली और पार्टी और आगे पहुंच गई 1991 में अयोध्या (भगवान राम) ने बीजेपी को 119 सीटें दिला दीं।&lt;br /&gt;बीजेपी उत्तर प्रदेश और पूरे देश में जम चुकी थी। कई राज्यों में सरकारें भी बन गई थीं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों की मेहनत काफी हद तक काम पूरा कर चुकी थी। 1999 में एक स्वयंसेवक के प्रधानमंत्री बन जाने के बाद बचाखुचा काम भी पूरा हो गया।&lt;br /&gt;बस यहीं से बीजेपी के कांग्रेस बनने की शुरुआत हो गई। अब RSS ने बीजेपी से अखबारों-टीवी चैनलों की बहसों में किनारा करना शुरू कर दिया। स्वेदशी जागरण मंच, विश्व हिंदू परिषद जैसे संघ के सभी अनुषांगिक संगठन बीजेपी के खिलाफ अलग-अलग मुद्दों पर बीजेपी के खिलाफ नारा लगाने लगे थे। अटल-आडवाणी और सिंघल-तोगड़िया की मुलाकात अखबारों की सुर्खियां बनने लगी। अब बीजेपी-RSS को ये पता नहीं लग पा रहा था कि अंदर-अंदर जनता कैसे बदल रही है। पता तब लगा जब इंडिया शाइनिंग का नारा फ्लॉप हुआ और कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सत्ता में आ गई।&lt;br /&gt;लेकिन, तब तक RSS-VHP-SWADESHI JAGARAN MANCH बीजेपी से पूरी तरह दूर हो चुका था। और, यूपी में बीजेपी का वोटर बीजेपी से। वो उत्तर प्रदेश ही था जहां से कांग्रेस गायब हुई तो, आजतक वापसी का इंतजार कर रही है। उत्तर प्रदेश में संघ के ज्यादातर दिग्गज अब बीजेपी में थे और संघ को ये समझाने की कोशिश कर रहे थे कि अब एजेंडा तय करने का काम संघ नहीं बीजेपी के ऊपर छोड़ देना चाहिए। लेकिन, मुश्किल वही कि एजेंडा तय करने वाले बीजेपी के नेता अब मंचों पर थे और जमीन पर काम करने वाले बचे-खुचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक स्वयंसेवा में लग गए थे। कोई ऐसा प्रेरणा देने वाला नेता भी उन्हें नजर नहीं आ रहा था। संघ ने बीजेपी को छोड़कर अपनी शाखाएं लगानी शुरू कर दीं लेकिन, शाखाओं में मुख्य शिक्षक के अलावा ध्वज प्रणाम लेने वाले भी मुश्किल से ही मिल रहे थे।&lt;br /&gt;वजह ये नहीं थी कि लोगों को संघ की विचारधार अचानक इतनी बुरी लगने लगी थी कि वो शाखा नहीं जाना चाहते थे। वजह ये थी कि उन्हें ये दिख रहा था कि उन्हें शाखा से निकालकर बीजेपी विधायक सांसद के चुनाव में पर्ची काटने पर लगाने वाले RSS के प्रचारक सत्ता की मलाई काटने में लगे थे। RSS-बीजेपी के कैडर/नेताओं पर से लोगों का भरोसा उठ गया था। ये जब ब्राह्मणों को अपना वोटबैंक समझकर दूसरों को लुभाने में लगे थे। तो, पिछले दो दशक से उत्तर प्रदेश में हाशिए पर पहुंच गया ब्राह्मण बीएसपी कोऑर्डिनेटर के साथ बैठकर मुलायम के गुंडाराज के खिलाफ स्ट्रैटेजी तैयार कर रहा था। 1991 से कमल निशान पर ही वोट डालता आ रहा पक्का संघी वोटर भी 2007 में पलट गया और इलाहाबाद की शहर उत्तरी जैसी सीट से भी कमल गायब हो गया। ये वो सीट थी जहां हर दूसरे पार्क में 2000 तक शाखा लगती थी और हर मोहल्ले में दस घर ऐसे होते थे जहां हफ्ते में एक बार प्रचारक भोजन के लिए आते थे। अब सुविधाएं बढीं तो, प्रचारकों को स्वयंसेवकों के घर भोजन करने की जरूरत खत्म हो गई। और, इसी के साथ संघ का सीधे स्वयंसेवकों के साथ संपर्क भी खत्म हो गया। सीधे संपर्क का यही वो रास्ता था जिसके जरिए संघ ने राम मंदिर आंदोलन खड़ा किया था। ये एकदम सही नहीं है कि राम मंदिर आंदोलन खड़ा होने से संघ से लोग जुड़े। संघ-बीजेपी के लोग भी इस भ्रम में आ गए कि जयश्रीराम के नारे की वजह से ही लोग बीजेपी-संघ के साथ खड़े हो रहे हैं। जबकि, सच्चाई यही थी कि जब संघ के स्वयंसेवक लोगों के परिवार का हिस्सा बन गए थे, जब लोगों के निजी संपर्क में थे, जब उनके दुखदर्द परेशानी में उनके साथ खड़े थे तो, संघ का हर नारा बुलंद हुआ। लेकिन, जब संघ के लोग सत्ता के लोभी होने लगे। जब संघ के स्वयंसेवक सिर्फ विधानसभा/लोकसभा टिकट, पेट्रोलपंप/गैस एजेंसी के लिए संघ कार्यालयों से झोला लेकर निकलने लगे तो, संघ की शाखाओं में सिर्फ टिकटार्थी और सत्ता से सुख पाने के लोभी ही बचे। जाति के समीकरण ज्यादा हावी हुए लेकिन, इस बार अंदर ही अंदर।&lt;br /&gt;जब बीजेपी विधानसभा चुनाव का ऐलान हुआ तो, भी RSS, बीजेपी के साथ कहीं नहीं दिख रहा था। बीजेपी का व्यवहार लोगों में ये भ्रम पैदा कर रहा था कि कहीं बीजेपी-समाजवादी पार्टी का कहीं अंदर ही अंदर कोई समझौता तो नहीं हो गया है। और, मायावती दहाड़ रही थी- मेरे सत्ता में आने के बाद गुंडे या तो जेल में होंगे या प्रदेश से बाहर। बचे-खुचे संघ के स्वयंसेवक भी बहनजी के कार्यकाल को मुलायम से बेहतर बता रहे थे।&lt;br /&gt;अब भी बीजेपी और संघ के लोग नेता और स्ट्रैटेजी बदलकर 2009 का लोकसभा का चुनाव जीतने का भरोसा पाल रहे हैं। लेकिन, ये साफ है कि अगर संघ सचमुच चाहता है कि बीजेपी 2009 के लोकसभा चुनाव में बेहतर करे तो, उसे लोगों से संपर्क जोड़ने होंगे और अपने मूल काम स्वयंसेवक तैयार करने पर ही जोर-शोर से लगना होगा। नेता तैयार करने का काम बीजेपी पर ही छोड़ देना ज्यादा बेहतर होगा। लेकिन, संघ अभी भी अपने मूल काम को छोड़कर इस समीक्षा में लगा हुआ है कि बीजेपी की हार की वजह आधे मन से हिंदुत्व को अपनाना है। दरअसल बीजेपी की हार की वजह ये है कि उसका कोई आधार नहीं रहा। ये आधार बीजेपी को संघ और उसकी विचारधारा से जुड़े लोगों से मिलता रहा है। इसलिए, RSS के मुखपत्र ऑर्गनाइजर में बीजेपी को चुनाव में हार के लिए जिम्मेदार ठहराना संघ का सच्चाई से आंख मूंदने जैसा लग रहा है। सही बात तो ये है कि उत्तर प्रदेश में RSS के स्वयंसेवक, RSS का सिस्टम फेल हुआ है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-1574673487024142727?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/1574673487024142727/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=1574673487024142727' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/1574673487024142727'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/1574673487024142727'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2007/11/rss.html' title='उत्तर प्रदेश में RSS के स्वयंसेवक फेल हुए हैं'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-702839149605633308</id><published>2007-11-03T08:19:00.001+05:30</published><updated>2007-11-28T08:20:53.739+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चुनाव'/><title type='text'>यूपी के चुनाव बीजेपी-कांग्रेस के लिए सबक</title><content type='html'>&lt;strong&gt;Friday, May 11, 2007&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;यूपी में मायाराज हो गया है। और, ये सबसे बुरी खबर दिखती है मुलायम सिंह यादव और उनकी समाजवादी पार्टी के लिए। लेकिन, नतीजे आने के बाद माया मैडम का गुणगान करने वाले बीजेपी औऱ कांग्रेस नेताओं के लिए ये बड़ा सबक है क्योंकि, देश की दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के पास अपना कोई वोटबैंक ही नहीं रह गया है।&lt;br /&gt;यूपी का जनादेश सचमुच सबसे बुरी खबर मुलायम सिंह यादव के लिए ही लेकर आया है। मुख्यमंत्री रहते हुए माया मेमसाहब से उन्होंने जो व्यक्तिगत दुश्मनी पाल ली थी। अब मायाराज होने से उन्हें अपने सारे कारनामों का तगड़ा हिसाब देना पड़ सकता है। और, चुनाव के पहले से ही हाथी की चिंघाड़ से डरा सपा का कार्यकर्ता शायद ही अपने नेताजी के साथ मुखर होकर खड़ा हो सके। लेकिन, मुलायम के लिए अच्छी खबर ये है कि उनकी जमीनी ताकत बढ़ी ही है भले सीटें कम हुई हों। मुलायम को दो हजार दो के चुनाव से दो प्रतिशत ज्यादा 27 प्रतिशत वोट मिले हैं।&lt;br /&gt;मुलायम से यूपी का राज छिना तो, ब्राह्मण-दलित-अति पिछड़ों के हाथी की सवारी से साफ है कि ये फॉर्मूला चलता रहा तो, 2009 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी का कमल खिलने में बहुत मुश्किलें हैं। अब बीजेपी को ये भी सोचना होगा कि वो आडवाणी के ही नेतृत्व की ओर फिर मुंह ताके या फिर नए नेतृत्व की तलाश करे। साथ ही सवाल ये भी है कि क्या आडवाणी हिंदुत्व और जयश्रीराम के नारे के दम पर ही सत्ता तलाशता रहेगा। या फिर अपने कैडर-कार्यकर्ता को मजबूत करके दिल्ली की गद्दी पर मजबूती से काबिज होने की कोशिश करेगा। वैसे बीजेपी के लिए बुरी खबर ये है कि हिंदुत्व के नाम पर अब तक उसके पाले में आता रहा उसका ब्राह्मण-बनिया वोटबैंक भी इस बार बसपा के साथ सरक गया है। साफ है कि माया मेमसाहब ने बीजेपी का वो हाल कर दिया है जो, कांग्रेस का 1989 के बाद हुआ था। यानी साफ है कि देश की दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के पास अब अपना कोई वोटबैंक नहीं रह गया है।&lt;br /&gt;राजनीति में राहुल बाबा अभी बच्चे ही हैं ये भी इन चुनावों ने साबित किया है। राहुल गांधी को उनके जनता से पूरी तरह कट चुके सलाहकारों ने जो समझाया -- और उसके बाद जो वो बोले -- उससे वो भी कांग्रेस से जुड़ने से पहले ही कट गए। जो, राहुल गांधी के रोड शो में आई भीड़ को कांग्रेस की तरफ आता वोटबैंक समझकर कांग्रेस के लिए वोट डालने का मन बना रहे थे। कुल मिलाकर इन चुनावों से ये बात और पुख्ता हो गई कि फिलहाल तो कांग्रसे बस यूपी के दो जिलों सुल्तानपुर-रायबरेली की ही पार्टी बनकर रह गई है। वैसे कांग्रेस के लिए अच्छी खबर ये है कि माया मैडम को पूर्ण बहुमत मिल गया है। लेकिन, ये अच्छी खबर तभी रहेगी जब पार्टी राज्य में सत्ता की भागीदारी के सुख की तलाश छोड़कर अगले पांच साल कार्यकर्ताओं को खड़ा करने में लगाए। लेकिन, मायावती जिस तेवर में नजर आ रही हैं उसमें दोनों राष्ट्रीय पार्टियों बीजेपी-कांग्रेस के लिए यूपी से होकर दिल्ली जाने वाला रास्ते की मुश्किलें बहुत बढ़ गई हैं। और, मुख्यमंत्री बनने के बाद मायावती ने जो, कुशल प्रशासक और खांटी नेता जैसे तेवर दिखाएं हैं उससे दोनों राष्ट्रीय पार्टियों का आने वाले लोकसभा चुनाव और कठिन हो सकता है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-702839149605633308?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/702839149605633308/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=702839149605633308' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/702839149605633308'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/702839149605633308'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2007/11/blog-post_9918.html' title='यूपी के चुनाव बीजेपी-कांग्रेस के लिए सबक'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-1083849977081996071</id><published>2007-11-03T08:18:00.000+05:30</published><updated>2007-11-28T08:20:53.739+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चुनाव'/><title type='text'>नेताओं की करतूत से लोकतंत्र पर हावी नौकरशाही</title><content type='html'>Sunday, May 06, 2007&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;उत्तर प्रदेश में चुनाव बिना किसी गड़बड़ी के पूरा हो रहा है। सिर्फ आखिरी सातवां चरण बाकी है। ये सब हो सका है चुनाव आयोग की सख्ती से। निस्संदेह चुनाव आयोग को बधाई मिलनी चाहिए। शुरू से ही सात चरणों में चुनाव कराए जाने पर आयोग की दबी जुबान से ही सही आलोचना भी हो रही थी।लेकिन, चुनाव आयोग ने साफ कह दिया कि देश के सबसे बड़े प्रदेश में निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए ये जरूरी है।सेना और दूसरी पैरामिलिट्री फोर्सेज को चुनाव आयोग ने लोकतंत्र की पहरेदारी में लगा दिया। फर्जी वोट डालने वाले दूर से ही नमस्ते करते दिखे। और, जिन्होंने इसके बाद भी हिम्मत दिखाई वो, जवानों की बूट की ठोकर खाने के बाद सुधरे।&lt;br /&gt;लेकिन, क्या सचमुच उत्तर प्रदेश के चुनाव निष्पक्ष हुए हैं और हुए भी हैं तो क्या ये निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की मजबूती दिखा रहे हैं। दो छोटे उदाहरण हैं जिनसे साफ है कि चुनाव निष्पक्ष भले ही हुए हों। लोकतंत्रपिसता नजर आ रहाहै और, इसके लिए जिम्मेदार नेता ही हैं।उन्होंने नौकरशाही को ऐसा मौका दिया कि अब उनसे भी मामला संभालते नहीं बन रहा। नौकरशाही के हावी होने के दोनों उदाहरणनेताओं से ही जुड़े हैं। पहला उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सलमान खुर्शीद और उनकी पत्नी लुइस खुर्शीद का ही नाम मतदाता सूची से गायब है। सलमान खुर्शीद कांग्रेस के बड़े नेता हैं और लुइस तो खुद ही फरुखाबाद की कायमगंज सीट से कांग्रेस प्रत्याशी हैं। अब सवाल ये कि क्या चुनाव आयोग की ये जिम्मेदारी नहीं बनती कि फर्जी वोट न पड़े इसके साथ ही वो ये भी सुनिश्चित करे कि जो वोट देने के लायक हैं वो वोट डाल सकें। और, अगर खुद चुनाव लड़ने वाले का ही नाम मतदाता सूची से गायब है तो, फिर ये कैसे माना जा सकता है कि चुनाव निष्पक्ष हैं क्योंकि खुद प्रत्याशी ही अपने पक्ष में वोट नहीं डाल सकता। लुइस खुर्शीद और सलमान खुर्शीद का आरोप है कि कायमगंज विधानसभा में पैंसठ हजार वोट फर्जी जुड़े हैं जबकि, असली वोटरों को वोटर लिस्ट से बाहर कर दिया गया है।&lt;br /&gt;दूसरा मामला सपा नेता अमर सिंह से जुड़ा है। अमर सिंह के छोटे भाई अरविंद सिंह ने माना है कि उनकेबड़े भाई अमर सिंह दो-दो जगह से वोट डालने की हैसियत में हैं। क्योंकि, उनका नाम गाजियाबाद के अलावा आजमगढ़ के पैतृक घर से भी वोटर लिस्ट में शामिल है। ये दो बड़े उदाहरण हैं जो, साफ कर देते हैं कि चुनाव निष्पक्ष नहीं हुए हैं। हां, इतना जरूर हुआ कि बिना वोटर लिस्ट में नाम और हाथ में मतदाता पहचान पत्र के लोगों को वोट नहीं डालने दिया गया। लेकिन, अब इस बात की जिम्मेदारी किसकी होगी कि बूथ के बाहर से भगाए गए लोग फर्जी वोटर थे या फिर उनके भी नाम सलमान और लुइश खुर्शीद की तरह मतदाता सूची से पहले से ही साफ कर दिया गया था। और, कई ऐसे वोटर भी थे उत्तर प्रदेश की एक ही या अलग-अलग विधानसभा में कई-कई वोट डाल रहे थे।&lt;br /&gt;कई घरों में तो हाल ये था किलोकसभा और नगर निगम चुनावों में वोटडालने वाले ही इस चुनाव में वोटर लिस्ट से बाहर कर दिए गए थे। मतदात पहचान पत्र उनके पास थे भी तो, सेना के कड़क जवाने के सामने जिरह करने की उनकी हिम्मत नहीं पड़ी। शायद यही वजह रही कि किसी भी चरण में मतदान का प्रतिशत पचास के नीचे ही रहा। कई घरों में तो घर का मुखिया घर के लोगों दूर से ही छोड़कर आया क्योंकि, उसका नाम वोटर लिस्ट से ही गायब हो गया था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दरअसल ये पिछल साठ सालों से नेताओं की करतूत थी। जिसका खामियाजा अब देश का लोकतंत्र भुगत रहा है। और, इन नेताओं ने लोकतंत्र का इतना मजाक-फायदा उठाया है कि लोकतंत्र के लोग भी चुनाव आयोग की ज्यादतियों को व्यवस्था की सफाई का हिस्सा मानकर चुप बैठे हैं। सच्चाई ये है कि व्यवस्था की सफाई के साथ ही नौकरशाही के हावी होने की शुरुआत भी हो गई है।पूरा चुनाव भर नौकरशाही तानाशाही पर उतारू रही और व्यवस्था की बरबादी के नेता सहमे रहे। और, फिर नेताओंके पीछे रहने वाली जनता कैसे बोल पाती।&lt;br /&gt;अब तक उत्तर प्रदेश का जनादेश जिधर जाता दिख रहा है, उससे लग रहा है कि जल्द ही देश के इस सबसे बड़े प्रदेश के लोगों को एक बार फिर से सेना की संगीनों के साये में ज्यादा बिगड़े नेताओं में से कम बिगड़े नेता का चुनाव करना होगा। इसलिए जरूरी ये है कि आगे से चुनाव आयोग के भरोसे बैठने की बजाए लोग ही लोकतंत्र की रक्षा के लिए आगे आएं। क्योंकि, नौकरशाही को लोकतंत्र की लगाम थामने की छूट मिल गई तो, लोकतंत्र और निष्पक्षता दोनों ही तानाशाही की भेंट चढ़ जाएंगे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-1083849977081996071?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/1083849977081996071/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=1083849977081996071' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/1083849977081996071'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/1083849977081996071'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2007/11/blog-post_02.html' title='नेताओं की करतूत से लोकतंत्र पर हावी नौकरशाही'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='//lh5.googleusercontent.com/-DnWjOFA7tLA/AAAAAAAAAAI/AAAAAAAAAbM/OpUI3VRFQok/s512-c/photo.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-536181205741328298.post-3667908682107025915</id><published>2007-11-03T08:15:00.000+05:30</published><updated>2007-11-28T08:20:32.905+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चुनाव'/><title type='text'>किसका चुनाव करेंगे बुलेट या बैलेट</title><content type='html'>&lt;strong&gt;Tuesday, April 10, 2007&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;उत्तर प्रदेश में 30 सांसद और 150 विधायक अपराधिक रिकॉर्ड वाले हैं। यानी ये वे लोग हैं जिनके डर के बाद भी लोगों ने इनके खिलाफ मुकदमे दर्ज करा दिये हैं। पता नहीं खबर बिग बी --- शहंशाह अमिताभ बच्चन ने पढ़ी-सुनी या नहीं। खबर बच्च्न साहब के लिए ज्यादा महत्व की इसलिए भी है क्योंकि,सिर्फ बच्चन साहब ही दम ठोंककर ये कह रहे हैं यूपी में बहुत दम हैं क्योंकि जुर्म यहां कम है। और, बच्चन साहब और उनके दोस्त अमर सिंह का जानकारी के लिए ये आंकड़े किसी मीडिया हाउस के या विपक्षी पार्टी के आरोप नहीं हैं ये आकंड़े हैं उत्तर प्रदेश के गृह विभाग के-- यानी गृह विभाग जानते हुए भी इन अपराधियों की सुरक्षा के लिए पुलिसबल का इंतजाम करताहै, वजह सिर्फ इतनी कि ये आपके वोट की ताकत से चुने हुए जनप्रतिनिधि है। ------&lt;br /&gt;ये वो जनप्रतिनिधि हैं जिनको आपने पिछले विधानसबा और लोकसभा चुनाव में वोट दिया कि वो आपके बुनियादी हक के लिए लड़ाई लड़ेंगे जिससे आपकी जिंदगी कुछ औऱ बेहतर हो सकेगी। कम से कम वोट मांगते वक्त तो इनका यही दावा था। लेकिन, ऐसे जनप्रितिनिधि क्या खास आपके हकों की लड़ाई लड़ पाएंगे। जिनका आधा से ज्यादा समयअदालतों में सिर्फ इसलिए बीत जाता है कि कहीं अदालत इन्हें अपराधी घोषित न कर दे और अगली बार ये आपसे ये वादा करने न आ पाएं कि हम आपकी जिंदगी के हालात सुधारने आ रहे हैं । तो, इस बार वोट डालने जाइए तो, जरा संभलकर क्योंकि, बैलेट बुलेट पर पांच साल में सिर्फ एक ही दिन भारी पड़ता है और तो, सत्ता और अपराधियों का गठजोड़ बैलेट को बुलेट दिखाकर डराता ही रहता है। यूपी के अपराधी सांसदों -विधायकों की गृह विभाग ने आज सूची पेश की है औरआज ही एक और खबरआई है। फैजाबाद के मिल्कीपुर विधायक रामचंद्र यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अब आप कहेंगे कि जब 150 विधायकों के खिलाफ अपराधिक मामले हैं तो फिर किसी विधायक की गिरफ्तारी की खबर मेंखासक्याहै। लेकिन, ये खास इसलिए है क्योंकि, समाजवादी पार्टी के इन विधायक जी के खिलाफ कोर्ट ने गैरजमानती वारंट जारी कर रखा था। और, अब ये पकड़ में इसलिए आ गए हैंकि इन्हें चुनाव लड़ना है। वरना तो, ये मजे से घूम रहे थे लेकिन, पुलिस को ढूंढ़े नहीं मिल रहे थे।और, इन साहब के चुनाव प्रचार में जो जी-जान से जुटे हैं वो हैं मित्रसेन यादव-- ये भी कोई कम नहीं हैं-- असल बात इन दोनों खबरों जैसी ढेर सारी खबरें हमें रोज सुनने देखने को मिलती हैं लेकिन, हम हमारे ऊपर क्या असर होगा सोचकर इनके बगल से आंख मूंदकर निकल जाते है। आपको लग रहा होगा फिर मैं अभी हल्ला क्यों मचा रहाहूं। हल्ला मचाने की वजहहै यूपी विधानसभा के सात चरणों में होने वाले चुनाव। चुनाव आयोग ने सात चरणों में यहां वोटिंग का ऐलान किया है। दरअसल ऊपर की दोनों खबरें और चुनाव आयोग का सात चरणों में चुनाव का ऐलान , एक दूसरे से जुड़ी हुई खबरें हैं। असल बात ये है कि 150 विधायक- 30 सांसद(इतने लिस्टेड हैं) अपराधियों के अलावा दूसरे ऐसे ही रिकॉर्ड वाले अपराधियों (ये सब चुनाव भी लड़ेंगे।)&lt;br /&gt;से निपटने की तैयारी में ही आयोग सात चरणों में चुनाव करा रहा है। यूपी की सीमा से लगे सभी राज्यों के डीजीपी भी अलर्ट हैं कि इस राज्यपर कहीं उनका कब्जा न हो जाए जो, गृह विभागके अपराधियों की सूची में होने के बाद भी गृह विभाग के ही मातहत आने वाले पुलिस की संगीनों के साये में अपराध करते घूमते रहें। लेकिन, ये चुनाव आयोग के बस की बात है ये मुझे नहीं लगता। क्योंकि, ये ताकत सिर्फ आपके हाथ में है।और मेरे कहने का आशय बिल्कुल भी ये नहीं है कि सिर्फ समाजवादी पार्टी में ही अपराधी रिकॉर्ड वाले लोग हैं। सभी पार्टियों में थोड़ कम-थोड़ा ज्यादा वाले अंदाज मे अपराधी सम्मानित हो रहे हैं। प्रदेश की 403 में से कम से कम 250 विधानसभा ऐसी हैं जिसमें डेमोक्रेसी का लिटमस टेस्ट होना है। क्योंकि, इन विधानसभा से पहले से चुने हुए विधायक या फिर विधायकजी बनने की इच्छा रखने वाले कोई सज्जन (साबित न होने तक यही कहा जाता है) नामांकन भर चुके हैं या फिर भरने की पूरी तैयारी कर चुके हैं।देश को राह दिखाने का दम भरने वाला उत्तम प्रदेश (अब सिर्फ विज्ञापनों में) उत्तरोत्तर गर्त में ही जाता दिख रहा है। तो, एक दिन अपनेऔर अपने प्रदेश के लिए मनबना लीजिए। सभी पार्टियों में थोड़े कम ज्यादा अपराधी और बचे खुचे शरीफ मिल ही जाएंगे।इसलिए कोशिश करके इस बार बचे खुचे शरीफों को अपराधी बनने रोकिए। नहीं तो, अगले विधासनभा चुनाव तक गृह विभाग की सूची शायद और लंबी होगी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/536181205741328298-3667908682107025915?l=updiary.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://updiary.blogspot.com/feeds/3667908682107025915/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=536181205741328298&amp;postID=3667908682107025915' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/3667908682107025915'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/536181205741328298/posts/default/3667908682107025915'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://updiary.blogspot.com/2007/11/blog-post.html' title='किसका चुनाव करेंगे बुलेट या बैलेट'/><author><name>HARSHVARDHAN TRIPATHI</name><uri>https://profiles.google.com/114875549099099357243</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' 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